यूजीसी रोलबैक को लेकर आगरा में बवाल: एक्सप्रेसवे पर पथराव, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
आगरा में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में ट्रैक्टर मार्च के दौरान बवाल हुआ। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर यमुना एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित किया।
आगरा में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में रविवार को निकाले गए ट्रैक्टर मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। खंदौली के मुड़ी चौराहे से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंच गए और करीब 45 मिनट तक यातायात बाधित रहा।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वे यूजीसी के नए नियमों के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्ट्रेट का घेराव करने जा रहे थे। सुबह करीब 11:30 बजे 300 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ मार्च शुरू हुआ। पुलिस और पीएसी की तैनाती पहले से की गई थी।
बैरिकेडिंग तोड़कर एक्सप्रेसवे पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी नादऊ में यमुना एक्सप्रेसवे के पुल के नीचे पहुंचे, जहां पुलिस-प्रशासन ने हाइड्रा, जेसीबी, बैरिकेडिंग और पीएसी के जरिए रास्ता बंद कर रखा था। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटा दी और खेतों तथा सर्विस रोड के रास्ते एक्सप्रेसवे पर पहुंच गए।
प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को सड़क पर खड़ा कर दिया, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात रुक गया। करीब 45 मिनट तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही और सड़क पर लंबा जाम लग गया। बाद में पुलिस और प्रदर्शनकारी नेताओं की समझाइश के बाद लोग एक्सप्रेसवे से नीचे उतर गए।
नाई की सराय में फिर हुआ टकराव
एक्सप्रेसवे से नीचे उतरने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों के साथ शहर की ओर बढ़े। नाई की सराय के पास पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान स्थिति फिर बिगड़ गई। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों की ओर ट्रैक्टर बढ़ाने का प्रयास किया।
हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसी दौरान पथराव की घटना भी सामने आई। पथराव में सड़क से गुजर रहे एक कंटेनर के शीशे टूट गए। लाठीचार्ज के दौरान खंदौली के आविदगढ़ निवासी सचिन के पैर में चोट लगने की बात सामने आई, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। दोपहर करीब तीन बजे पुलिस आयुक्त दीपक कुमार भी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
ज्ञापन को लेकर प्रदर्शनकारियों में मतभेद
प्रदर्शन के अंतिम चरण में ज्ञापन सौंपने को लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच भी मतभेद सामने आया। यूजीसी मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह समेत वरिष्ठ नेताओं ने एसडीएम एत्मादपुर सुमित कुमार सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
हालांकि, कुछ युवा प्रदर्शनकारियों ने इस पर आपत्ति जताई और जिलाधिकारी को मौके पर बुलाकर ज्ञापन सौंपने की मांग की। इसे लेकर काफी देर तक गहमागहमी रही। बाद में वरिष्ठ नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने युवाओं को समझाकर शांत कराया।
तीन स्तर की सुरक्षा के बावजूद एक्सप्रेसवे तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
ट्रैक्टर मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने शनिवार रात की वार्ता के बाद सुरक्षा की तीन स्तर की व्यवस्था की थी। नादऊ में एक्सप्रेसवे के पुल के नीचे बैरिकेडिंग, जेसीबी-हाइड्रा और पीएसी वाहनों की तैनाती की गई थी।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर सर्विस रोड और खेतों के रास्ते एक्सप्रेसवे तक पहुंच गए। रविवार सुबह मुड़ी चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। करीब 11 बजे तक एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों के जुटने की बात सामने आई। इनमें आसपास के गांवों और दूसरे जिलों से आए लोग भी शामिल थे।
प्रदर्शनकारी हाथों में यूजीसी के नए नियमों के विरोध वाले पोस्टर लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़े। प्रशासन और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच समझाइश के बाद आखिरकार प्रदर्शन समाप्त हुआ।