आगरा में चलना मुश्किल: एक घंटे में पांच मिनट का सफर, पुलिस के पास भी नहीं कोई विकल्प; जाम से जूझ रहे लोग
आगरा में मेट्रो निर्माण, सड़क खुदाई, डायवर्जन और अतिक्रमण से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ गई है। पांच मिनट का सफर तय करने में एक घंटे तक लग रहा है। एंबुलेंस, स्कूली बच्चों और व्यापारियों को परेशानी हो रही है।
आगरा। शहर में मेट्रो निर्माण, सड़कों की खुदाई, डायवर्जन और अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। हालात ऐसे हैं कि पांच मिनट का सफर तय करने में एक घंटे तक का समय लग रहा है। एमजी रोड से लेकर हाईवे और शहर के प्रमुख चौराहों तक वाहन चालकों को रोजाना जाम से जूझना पड़ रहा है। इसका असर आम लोगों के साथ मरीजों, स्कूली बच्चों और व्यापारियों पर भी पड़ रहा है।
सुबह और शाम के व्यस्त समय में सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। जाम में एंबुलेंस फंसने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है, वहीं स्कूल वैन और बसों में सवार बच्चों को घर पहुंचने में देरी हो रही है। निर्माण कार्यों के बीच बिना प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था के लागू किए जा रहे डायवर्जन ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
अमर उजाला के अभियान 'ऑपरेशन ट्रैफिक' के तहत शहर के व्यापारियों, चिकित्सकों और अधिवक्ताओं ने यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी और जमीनी हकीकत से दूर बनाई जा रही योजनाओं के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
एमजी रोड और हाईवे पर सबसे ज्यादा परेशानी
एमजी रोड और हाईवे शहर के प्रमुख मार्ग हैं, लेकिन इन दोनों पर ही रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। मेट्रो निर्माण कार्य और सीएम ग्रिड परियोजना के तहत चल रहे कार्यों के कारण कई स्थानों पर यातायात प्रभावित है। दिन के साथ रात में भी वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
अन्य मार्गों पर भी डायवर्जन और अतिक्रमण के कारण वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मियों की तैनाती और अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
जाम में एंबुलेंस फंसने से मरीजों की जान पर खतरा
आईएमए अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र गुप्ता ने कहा कि निर्माण कार्यों और त्योहारों के दौरान रास्ते बंद कर दिए जाते हैं या डायवर्जन लागू कर दिया जाता है, लेकिन प्रभावी वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था नहीं होती। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ता है। जाम में एंबुलेंस फंसने से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. कैलाश चंद सारस्वत ने चौराहों पर बेतरतीब खड़े ऑटो को जाम की प्रमुख वजहों में शामिल किया। उन्होंने ऑटो के लिए निर्धारित स्टैंड बनाने, अतिक्रमण की हदबंदी करने और यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने कहा कि शहर में एक साथ कई निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन इनके लिए समन्वित कार्ययोजना का अभाव दिखाई देता है। विभिन्न विभागों के बीच तालमेल नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने त्योहारों के दौरान स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई।
स्कूलों से लौटने वाले बच्चे भी परेशान
जयपुर हाउस निवासी मोहित गोयल ने बताया कि जाम के कारण स्कूल वैन से आने वाले बच्चे औसतन एक घंटे की देरी से घर पहुंचते हैं। गर्मी के मौसम में बच्चों को काफी परेशानी होती है और कई बार उनकी तबीयत भी खराब हो जाती है। उन्होंने स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात को सुचारु रखने के लिए विशेष योजना बनाने की मांग की।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की छुट्टी के समय प्रमुख मार्गों और चौराहों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को पहले से व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बच्चों को घंटों जाम में न फंसना पड़े।
अतिक्रमण से बाजारों में कारोबार प्रभावित
लोहार गली व्यापार समिति के अध्यक्ष संदीप गुप्ता ने बताया कि घने बाजारों में पहले से ही जगह सीमित है। इसके बावजूद कुछ दुकानदार चार से पांच फीट तक सड़क पर सामान रख देते हैं। इससे वाहनों की आवाजाही बाधित होती है और जाम लग जाता है। उन्होंने सड़क पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
आगरा इलेक्ट्रिकल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि जाम के कारण व्यापारियों को अपने प्रतिष्ठानों तक पहुंचने में परेशानी होती है। त्योहारों के नजदीक होने के बावजूद ग्राहक दुकानों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
व्यापारी वेद पाल धर ने कहा कि अब घर से निकलने से पहले ही लोगों को रास्ते के बारे में सोचना पड़ता है, लेकिन किसी भी मार्ग पर जाने पर जाम का सामना करना पड़ता है।
व्यापारी सचिन मल्होत्रा ने बताया कि कई जगह हालात ऐसे हो जाते हैं कि पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही कम हो जाती है। व्यापारी आदित्य माहेश्वरी के मुताबिक, जाम के कारण ग्राहकों का दुकानों तक पहुंचना और लोगों का समय पर घर लौटना मुश्किल हो गया है।
धनौली से दीवानी पहुंचने में लग रहे दो से तीन घंटे
अधिवक्ता उर्वशी वर्मा ने बताया कि पहले धनौली से दीवानी पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगता था, लेकिन अब इसमें दो से तीन घंटे तक लग रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले छह महीने से एमजी रोड पर रावली, हरीपर्वत और खेरिया मोड़ के आसपास जाम की समस्या बनी हुई है। 18 अक्टूबर से खेरिया ओवरब्रिज बंद होने के बाद परेशानी और बढ़ गई है।
अधिवक्ता सूरज सिंह ने बताया कि पथौली से दीवानी जाते समय शाहगंज में जाम का सामना करना पड़ता है। एमजी रोड पर भी यातायात की स्थिति खराब है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यातायात संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता।
अधिवक्ता विशाल चौधरी ने बताया कि सिकंदरा चौराहे से ही जाम की समस्या शुरू हो जाती है। हाईवे पर मेट्रो निर्माण के कारण गुरुद्वारा गुरु का ताल तक वाहनों की कतारें लग जाती हैं। पहले दीवानी पहुंचने में करीब 15 मिनट लगते थे, लेकिन अब एक घंटे से अधिक समय लग रहा है।
ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रभावी प्लान की मांग
शहर के व्यापारियों, चिकित्सकों और अधिवक्ताओं ने यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें निर्माण कार्यों के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, पहले से तैयार वैकल्पिक मार्ग, चौराहों पर प्रभावी पुलिस व्यवस्था, ऑटो स्टैंड निर्धारित करना और अतिक्रमण के खिलाफ नियमित कार्रवाई शामिल हैं।
लोगों की मांग है कि एंबुलेंस, स्कूल बसों और जरूरी सेवाओं के वाहनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। त्योहारों के दौरान अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ व्यस्त मार्गों पर यातायात की निगरानी भी बढ़ाई जाए।
शहरवासियों का कहना है कि केवल बैठकें और निरीक्षण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरी है कि यातायात योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि आगरा के लोगों को रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिल सके।