दिवाली से पहले जहरीली हुई आगरा की हवा: सड़कों की खुदाई से सांसों पर संकट, शहीद नगर में एक्यूआई @410
आगरा में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शहीद नगर का AQI 410 और टेढ़ी बगिया का 406 दर्ज किया गया। धूल और निर्माण कार्यों के कारण सांस, आंखों और एलर्जी के मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
आगरा। ताजनगरी में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। शहर में सड़कों की खुदाई, निर्माण कार्य और उड़ती धूल ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आगरा स्मार्ट सिटी के सेंसरों में बुधवार को शहीद नगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 410 दर्ज किया गया, जबकि टेढ़ी बगिया में यह 406 तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बेहद गंभीर श्रेणी में रही। प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीएम ग्रिड योजना के तहत शहर में चल रहे सड़क निर्माण और खुदाई के कार्यों से बड़ी मात्रा में धूल उड़ रही है। इससे वातावरण में पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ रही है। स्मार्ट सिटी के सेंसरों के मुताबिक शहर के 26 चौराहों पर हवा की गुणवत्ता बेहद खराब और गंभीर स्थिति में दर्ज की गई।
संजय प्लेस में दोगुना हुआ AQI, पीएम-2.5 का स्तर पांच गुना अधिक
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को आगरा का औसत एक्यूआई 174 रहा। हालांकि, संजय प्लेस क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा खराब दर्ज की गई। यहां महज 24 घंटे में एक्यूआई लगभग दोगुना हो गया। 3 नवंबर को संजय प्लेस का एक्यूआई 169 था, जो बुधवार को बढ़कर 236 पहुंच गया।
यहां पीएम-2.5 का अधिकतम स्तर 323 दर्ज किया गया, जो निर्धारित स्तर से करीब पांच गुना अधिक बताया गया। वहीं पीएम-10 का स्तर भी चार गुना बढ़कर 409 तक पहुंच गया।
दूसरी ओर फतेहपुर सीकरी में प्रदूषण के स्तर में कुछ सुधार देखने को मिला। मंगलवार को यहां एक्यूआई 213 था, जो बुधवार को घटकर 163 रह गया।
शहीद नगर और टेढ़ी बगिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण
आगरा स्मार्ट सिटी के सेंसरों की रिपोर्ट में शहीद नगर और टेढ़ी बगिया सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहे। इन दोनों स्थानों पर पीएम-10 की मात्रा 800 तक पहुंच गई। इसके अलावा मीरा हुसैनी चौराहा, राजेश्वर मंदिर, छीपीटोला और राजामंडी सहित कई इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब दर्ज किया गया।
स्मार्ट सिटी सेंसरों के अनुसार प्रमुख स्थानों का एक्यूआई इस प्रकार रहा:
|
स्थान |
AQI |
|---|---|
|
शहीद नगर |
410 |
|
टेढ़ी बगिया |
406 |
|
मीरा हुसैनी चौराहा |
350 |
|
राजेश्वर मंदिर |
332 |
|
छीपीटोला |
327 |
|
राजामंडी |
325 |
|
तेज नगर |
322 |
|
सिकंदरा चौराहा |
321 |
|
धूलियागंज |
318 |
|
बाग फरजाना |
317 |
आंखों में जलन और सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी
बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। एसएन मेडिकल कॉलेज की नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्निग्धा सेन के अनुसार धूल के अतिसूक्ष्म कण आंखों में पहुंचने से खुजली, पानी आना, जलन और किरकिराहट जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
वहीं, वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि धूल और कार्बन के कण सांस की नली में पहुंचकर संक्रमण और अन्य परेशानियां पैदा कर रहे हैं। मरीजों को सीने में जकड़न, भारीपन और तेज खांसी की शिकायत हो रही है। अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों में अस्थमा अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। निर्माण कार्यों के दौरान उड़ती धूल और बढ़ते प्रदूषण के बीच बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।