गांधी शिल्प मेले में दिखा हुनर का अनोखा संगम, नारियल के खोल से सजावट और कबाड़ से बनी पेंटिंग ने खींचा ध्यान
आगरा के गांधी शिल्प मेले में कबाड़ से पेंटिंग, नारियल के खोल से सजावटी सामान और प्राकृतिक रंगों वाली मधुबनी कला आकर्षण का केंद्र बनी।
आगरा। सदर स्थित गांधी शिल्प मेले में देशभर के शिल्पकार अपनी अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और रचनात्मक प्रयोगों के साथ पहुंचे हैं। मेले में कबाड़ से तैयार पेंटिंग, नारियल के खोल से बने सजावटी सामान, टेराकोटा और कंक्रीट की मूर्तियां और प्राकृतिक रंगों से तैयार मधुबनी पेंटिंग दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
शिल्पकार पारंपरिक कला में नए प्रयोग कर अपने उत्पादों को अलग और आकर्षक रूप दे रहे हैं। मेले में आने वाले लोग इन कलाकृतियों को देखने के साथ-साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और इस्तेमाल की गई सामग्री के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।
कबाड़ से बना रहे आकर्षक पेंटिंग और स्ट्रक्चर
ललित कला संस्थान के बीएफए थर्ड ईयर के छात्र विशाल वेस्ट मैटेरियल को रचनात्मक कला का रूप दे रहे हैं। उन्होंने बेकार सामग्री से पेंटिंग और विभिन्न तरह के स्ट्रक्चर तैयार किए हैं। इसके अलावा टेराकोटा, कंक्रीट और मिट्टी से भी मूर्तियां और कलाकृतियां बनाई गई हैं। उनकी कलाकृतियों की कीमत करीब 200 रुपये से शुरू होती है।
दरभंगा से आए शिल्पकारों की बारीक कारीगरी भी मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पारंपरिक शैली में तैयार उनकी कलाकृतियों की कीमत 50 हजार रुपये तक है।
नारियल के खोल से तैयार हो रहे उपयोगी सामान
केरल की शिल्पकार सिनोज नारियल के खोल को नया रूप देकर उपयोगी और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। उनके स्टॉल पर अगरबत्ती स्टैंड, चम्मच, ज्वेलरी और विभिन्न डेकोरेशन आइटम उपलब्ध हैं।
नारियल के इस्तेमाल के बाद बचे खोल को फेंकने के बजाय उसे तराशकर आकर्षक वस्तुओं में बदला जाता है। सिनोज के अनुसार, नारियल से जुड़ी सामग्री को नए तरीके से इस्तेमाल करने का शौक उन्हें लंबे समय से है और इसी कला के जरिए वह नए उत्पाद तैयार कर रही हैं।
फूलों से तैयार होते हैं मधुबनी पेंटिंग के प्राकृतिक रंग
बिहार के संजीव कुमार अपने परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही मधुबनी पेंटिंग की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार इस पारंपरिक कला से जुड़ा हुआ है।
मधुबनी पेंटिंग की खासियत को बनाए रखने के लिए पेंटिंग में इस्तेमाल होने वाले रंग प्राकृतिक तरीके से फूलों से तैयार किए जाते हैं। प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक शैली में बनी ये पेंटिंग मेले में आने वाले लोगों को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं।
गांधी शिल्प मेले में अलग-अलग राज्यों से आए शिल्पकारों की कलाकृतियां भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला की विविधता को प्रदर्शित कर रही हैं। वेस्ट मैटेरियल के रचनात्मक इस्तेमाल से लेकर प्राकृतिक रंगों और नारियल के खोल की कलाकारी तक, मेले में कला के कई अनूठे रूप देखने को मिल रहे हैं।