Agra News: चिराग तले अंधेरा... जनसुनवाई से 45% फरियादी निराश, 16 स्थान गिरी डीएम की रैंकिंग
आगरा में जनसुनवाई की रैंकिंग 16 स्थान गिरकर 59वीं हुई। जुलाई में 45% फरियादी शिकायतों के निस्तारण से असंतुष्ट मिले।
आगरा। जिले में आम लोगों की समस्याओं के समाधान और उन्हें न्याय दिलाने की सबसे बड़ी उम्मीद जिलाधिकारी से होती है। लेकिन आगरा में जन शिकायतों के निस्तारण की तस्वीर फिलहाल ‘चिराग तले अंधेरा’ जैसी नजर आ रही है। यह स्थिति किसी अनुमान पर नहीं, बल्कि जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) की जुलाई 2026 की मूल्यांकन रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में आगरा के जिलाधिकारी की रैंकिंग 16 स्थान नीचे खिसक गई है। प्रदेश के 75 जिलों की रैंकिंग में आगरा को 59वां स्थान मिला है। कुल 130 अंकों में से जिले को 105 अंक यानी 80.77 प्रतिशत मिले।
45 प्रतिशत फरियादी निस्तारण से असंतुष्ट
10 अगस्त को जारी जुलाई 2026 की जनसुनवाई मूल्यांकन रिपोर्ट में सबसे चिंता वाली बात शिकायतों के निस्तारण को लेकर फरियादियों की संतुष्टि है।
जुलाई में शासन स्तर से 5,787 आवेदकों से फीडबैक लिया गया। इनमें से 3,133 यानी 54.14 प्रतिशत शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट मिले। वहीं, 2,654 आवेदक यानी करीब 45 प्रतिशत शिकायतों के समाधान से नाखुश रहे।
रैंकिंग प्रभावित होने की प्रमुख वजह निस्तारण की गुणवत्ता पर फरियादियों का असंतोष और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मिली खराब ग्रेडिंग को माना गया है।
सीएम कार्यालय के सत्यापन में भी सवाल
शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता जांचने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 33 मामलों का सत्यापन किया गया। इनमें से 5 शिकायतों को खराब गुणवत्ता के कारण सी श्रेणी में रखा गया। इस मानक पर जिले को सिर्फ 6 अंक मिले।
वहीं, अन्य उच्चाधिकारियों की ओर से श्रेणीकृत 49 शिकायतों में से एक मामले को सी श्रेणी में रखा गया। इससे साफ है कि शिकायतों के निस्तारण के बाद उनकी गुणवत्ता में अभी सुधार की गुंजाइश है।
कागजों पर कई मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद रिपोर्ट में कुछ मानकों पर प्रशासन का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
शिकायतों की फीडिंग: डीएम कार्यालय के लिए 654 शिकायतों की फीडिंग का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 1,215 शिकायतें फीड की गईं, जो लक्ष्य का 185.78 प्रतिशत है। इसके लिए पूरे 10 अंक मिले।
रैंडम श्रेणीकरण: अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा रैंडम श्रेणीकरण के 30 मामलों के लक्ष्य के मुकाबले 36 मामलों की जांच की गई। यह लक्ष्य का 120 प्रतिशत है।
आवेदकों से संपर्क: कुल 5,787 फीडबैक मामलों में से निस्तारणकर्ता अधिकारियों ने 4,730 आवेदकों से स्वयं संपर्क किया। यह आंकड़ा 81.73 प्रतिशत रहा।
डिफॉल्टर मामले: जिले में समय सीमा के बाद निस्तारित होने वाले डिफॉल्टर संदर्भों की संख्या 149 रही, जो कुल मामलों का 1.12 प्रतिशत है।
त्वरित अग्रसारण: शिकायतों की मार्किंग और अग्रसारण में औसतन केवल 0.25 दिन का समय लगा। यह शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की गति को दर्शाता है।
भौतिक सत्यापन: 40 मामलों के मासिक लक्ष्य के मुकाबले 41 संदर्भों का भौतिक सत्यापन किया गया। यह लक्ष्य का 102.50 प्रतिशत है।
अब गुणवत्ता सुधारने की चुनौती
आंकड़े बताते हैं कि शिकायतों की फीडिंग, अग्रसारण और सत्यापन जैसे प्रक्रियात्मक काम में प्रशासन ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन असली चुनौती शिकायतकर्ता की संतुष्टि और निस्तारण की गुणवत्ता है।
करीब 45 प्रतिशत फरियादियों का शिकायतों के समाधान से असंतुष्ट होना प्रशासन के लिए गंभीर संकेत है। यही वजह है कि बेहतर प्रक्रियात्मक प्रदर्शन के बावजूद जिले की कुल रैंकिंग नीचे चली गई।
डीएम बोले- जल्द दिखेगा सुधार
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा करने की बात कही है। उन्होंने कहा, “जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की जाएगी। जल्द सुधार दिखेगा। लापरवाही पर संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।”
अब देखना होगा कि अगले मूल्यांकन में प्रशासन फरियादियों की संतुष्टि और शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में कितना सुधार कर पाता है।