रक्षाबंधन पर सजा आगरा का बाजार: कैमरा, इविल आई और मीनाकारी राखियों का क्रेज, 40 रुपये की गोबर वाली राखी भी खास
रक्षाबंधन से पहले आगरा के बाजारों में कैमरा, इविल आई, मीनाकारी और भाई-भाभी कॉम्बो राखियों की मांग बढ़ी। 40 रुपये की तुलसी बीज वाली गोबर राखी भी खास आकर्षण है।
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही आगरा के बाजारों में राखियों की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ गई है। शहर के प्रमुख बाजारों में रविवार को बहनों और परिवारों की भीड़ देखने को मिली। इस बार राखियों के बाजार में परंपरा के साथ आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम नजर आ रहा है। कैमरा, इविल आई, मीनाकारी, कुंदन और भाई-भाभी कॉम्बो वाली राखियां लोगों को खास पसंद आ रही हैं।
बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और खिलौनों वाली राखियां बाजार में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। वहीं भाइयों को बुरी नजर से बचाने के संदेश वाली इविल आई राखी भी युवाओं के बीच खूब पसंद की जा रही है।
15 रुपये से शुरू, 300 रुपये तक के कॉम्बो की मांग
राजामंडी में राखी का कारोबार करने वाले संजय जैसवानी के मुताबिक, रक्षाबंधन की तैयारी दुकानदार करीब एक महीने पहले से शुरू कर देते हैं। दिल्ली, अलवर, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों से अलग-अलग डिजाइन की राखियां मंगाई जाती हैं।
बाजार में राखियों की कीमत करीब 15 रुपये से शुरू हो रही है। हालांकि 250 से 300 रुपये तक के भाई-भाभी कॉम्बो की मांग सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। इन कॉम्बो में भाई के लिए राखी के साथ भाभी के लिए मैचिंग लुंबा भी शामिल है।
महिलाओं के लिए 20 से 100 रुपये तक के मैचिंग कड़े और ब्रेसलेट राखियां भी उपलब्ध हैं। मीनाकारी, कुंदन और बीड्स वाली राखियों के साथ भाई-भाभी के कॉम्बो की भी खूब खरीदारी हो रही है। कुछ ग्राहक अपने भाइयों के लिए चांदी और सोने की राखियां भी खरीद रहे हैं।
कैमरा और इविल आई राखी बनी खास पसंद
इस बार बाजार में कैमरा डिजाइन वाली राखियां बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। बिचपुरी निवासी दिव्या शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने छोटे भतीजे के लिए कैमरे वाली राखी खरीदी है, जिसमें फोटो दिखाई देती है। भाई के लिए उन्होंने इविल आई और मीनाकारी वाली ब्रेसलेट राखी पसंद की।
राखियों के नए डिजाइन यह दिखा रहे हैं कि अब बहनें सिर्फ पारंपरिक धागे तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि भाई की पसंद और व्यक्तित्व के हिसाब से भी राखी चुन रही हैं।
सगी बहन नहीं, फिर भी भाई को बांधते हैं राखी
आवास विकास निवासी कृष्ण अग्रवाल की कहानी भी भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरती को दिखाती है। उनका कहना है कि उनकी कोई सगी बहन नहीं है, लेकिन वह हर साल अपने बड़े भाई को राखी बांधते हैं।
उनके अनुसार, रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे का साथ देने और हमेशा रक्षा करने के संकल्प का प्रतीक भी है।
40 रुपये की गोबर वाली राखी में छिपा है तुलसी का बीज
इस बार आगरा में पर्यावरण के लिहाज से भी एक खास पहल देखने को मिल रही है। नगर निगम की गोशाला से मिलने वाले गोबर से अब राखियां भी तैयार की गई हैं। इससे पहले गोबर से सीड बॉल्स, हवन सामग्री, धूपबत्ती और बंधनवार जैसे उत्पाद तैयार किए जा चुके हैं।
नगर निगम ने लव यू जिंदगी फाउंडेशन के सहयोग से गोबर से बनी राखियां तैयार कराई हैं। इनकी बिक्री नगर निगम कार्यालय स्थित स्टॉल पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक की जा रही है। रक्षाबंधन तक अवकाश के दिनों में भी स्टॉल पर राखियां उपलब्ध रहेंगी।
इन राखियों की कीमत 40 रुपये रखी गई है। खास बात यह है कि राखी में तुलसी का बीज भी रखा गया है। त्योहार के बाद राखी को कूड़े में फेंकने के बजाय गमले की मिट्टी में डालने पर इससे तुलसी का पौधा तैयार हो सकता है।
राखी की बिक्री से होगा गायों का कल्याण
पशु कल्याण अधिकारी अजय कुमार के अनुसार, इन राखियों को कान्हा गोशाला से प्राप्त गोबर से तैयार कराया गया है। इसका उद्देश्य वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के साथ लोगों को गोवंश से जुड़े उत्पादों के प्रति जागरूक करना भी है।
राखियों की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय को गायों के कल्याण और देखभाल में इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह यह राखी भाई की कलाई पर सजेगी, पर्यावरण का संदेश देगी और गोवंश के कल्याण में भी योगदान देगी।
रक्षाबंधन से पहले आगरा के बाजारों में एक ओर जहां आधुनिक और डिजाइनर राखियों की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर गोबर और तुलसी बीज वाली राखी जैसी पहल त्योहार को पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ रही है।