मौत दे रहे ये नाले: पांच साल में 20 लोगों की जान गई, बारिश में बढ़ जाता है खतरा; जिम्मेदार बेखबर
आगरा में खुले और गहरे नाले बारिश के दौरान जानलेवा बन रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पांच साल में नालों में गिरने से 20 लोगों की जान जा चुकी है। शहर के 410 नालों में कई 20 फीट तक गहरे हैं।
आगरा। शहर में बारिश का पानी निकालने के लिए बनाए गए खुले और गहरे नाले अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में नालों में गिरने से 20 लोगों की जान जा चुकी है। शहर में करीब 410 छोटे-बड़े नाले हैं, जिनमें कई नाले 20 फीट तक गहरे हैं। बारिश के दौरान जब सड़कें पानी में डूब जाती हैं तो सड़क और नाले के बीच का अंतर दिखाई नहीं देता। ऐसे में राहगीरों और वाहन चालकों के नाले में गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
20 फीट तक गहरे नाले, सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
आगरा के कई इलाकों में नाले खुले पड़े हैं। कुछ नाले इतने गहरे हैं कि इनमें गिरने के बाद बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। मंटोला, महावीर नाला और भैंरो नाला समेत शहर के करीब 18 नाले 20 फीट तक गहरे बताए जा रहे हैं।
बारिश के दौरान इन नालों में पानी का स्तर बढ़ जाता है। वहीं जलभराव होने पर सड़क और नाले का अंतर खत्म हो जाता है। यही स्थिति हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रही है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए ऐसे खुले नाले विशेष रूप से खतरनाक हैं।
राजपुर चुंगी और सुभाष बाजार के हादसों ने बढ़ाई चिंता
हाल में राजपुर चुंगी क्षेत्र में डबल पेट्रोल पंप के पास पांच बाइक सवारों के नाले में गिरने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद शहर में गहरे और खुले नालों को ढकने की मांग तेज हो गई।
वहीं सुभाष बाजार में चोक पड़े गहरे नाले में गिरने से गंगा देवी की मौत हो गई। इस तरह की घटनाओं ने एक बार फिर नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालों की सफाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। जहां नाले खुले हैं, वहां मजबूत आरसीसी स्लैब, लोहे के जाल, रेलिंग और पर्याप्त बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
पार्षदों ने भी गहरे नालों को ढकने की उठाई मांग
भाजपा पार्षद दल के उपनेता प्रकाश केसवानी ने कहा कि नालों में गिरकर कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने गहरे नालों को प्राथमिकता के आधार पर ढकने की मांग की।
वहीं बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने राजपुर चुंगी की घटना का हवाला देते हुए कहा कि गहरे नालों को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम में प्रस्ताव लाया जाएगा।
खुले नालों से स्वास्थ्य पर भी असर
खुले नाले सिर्फ हादसों का खतरा नहीं बढ़ा रहे, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहे हैं। नालों के किनारे शहर के पांच लाख से अधिक लोग रहने की बात सामने आई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. यतेंद्र चाहर के अनुसार, खुले नालों के आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध और गंदगी के कारण त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ सांस लेने में परेशानी हो सकती है। गंदे पानी और नालों के आसपास पनपने वाले क्यूलेक्स मच्छरों से एलर्जी और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो सुरक्षा इंतजाम
शहर में 410 नालों का नेटवर्क बारिश के पानी की निकासी के लिए जरूरी है, लेकिन खुले और गहरे नालों को बिना सुरक्षा इंतजाम के छोड़ना गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। बारिश शुरू होने के बाद नालों पर अस्थायी बैरिकेडिंग करने के बजाय संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर निगम गहरे नालों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर आरसीसी स्लैब या मजबूत लोहे के जाल से उन्हें ढके। साथ ही बारिश से पहले सभी नालों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
बीते पांच वर्षों में 20 लोगों की मौत का आंकड़ा बताता है कि समस्या सिर्फ जलभराव या सफाई की नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और जिंदगी से जुड़ी हुई है। अब जरूरत है कि हादसों का इंतजार करने के बजाय जिम्मेदार विभाग समय रहते ठोस कदम उठाएं।