आगरा में भावुक पल: किसान पिता से बोलीं राज्यपाल— ‘मैं भी किसान की बेटी हूं’, बेटी की सफलता पर दी शाबाशी
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किसान पिता से कहा, "मैं भी किसान की बेटी हूं।" फिरोजाबाद की छात्रा को दो स्वर्ण पदक मिले, जबकि आरबीएस कॉलेज के नरेंद्र सिंह ने चार स्वर्ण पदक जीतकर टॉप किया। साथ ही एंटी सर्वाइकल वैक्सीन अभियान का भी शुभारंभ किया गया।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा, मेहनत और प्रेरणा का अनूठा संगम देखने को मिला। खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान एक भावुक पल तब आया, जब राज्यपाल ने फिरोजाबाद की मेधावी छात्रा के किसान पिता से आत्मीय संवाद किया।
समारोह में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली फिरोजाबाद की प्रतिभाशाली छात्रा के पिता श्याम सुंदर से राज्यपाल ने उनके परिवार और पेशे के बारे में जानकारी ली। श्याम सुंदर ने बताया कि वे किसान परिवार से हैं। यह सुनते ही राज्यपाल मुस्कुराईं और बोलीं, "मैं भी किसान की बेटी हूं।" उन्होंने कहा कि एक किसान परिवार से होकर अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना और उसे इस मुकाम तक पहुंचाना गर्व की बात है। उन्होंने छात्रा की उपलब्धि की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पिता की पीठ थपथपाकर उनके संघर्ष और समर्पण को सम्मान दिया। यह पल पूरे सभागार में मौजूद लोगों के लिए बेहद प्रेरणादायक बन गया।
दीक्षांत समारोह में सबसे अधिक चर्चा आरबीएस कॉलेज के छात्र नरेंद्र सिंह की रही। नरेंद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए और समारोह के टॉपर बने। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें मंच पर स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनकी मेहनत, अनुशासन एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन की प्रशंसा की। समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहने, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज को बेहतर दिशा देना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने छात्राओं की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं के लिए एंटी सर्वाइकल (एचपीवी) वैक्सीन अभियान का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए यह टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है और सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को समय पर वैक्सीन अवश्य लगवाएं। उन्होंने इसे बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
92वें दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान, किसान परिवार की प्रेरणादायक कहानी और बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर दिए गए संदेश ने समारोह को यादगार बना दिया। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का यह संगम उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आया।