logo logo
logo logo

Contact Information

Branch office:- Shop 10 38/4A Basement, block Samriddhi building, near balaji juice ,J&k bank and Yes bank, Sanjay Palace, Sanjay Place, Civil Lines, Agra, Uttar Pradesh 282002

Call: +91 6399 505 060

agratrends@gmail.com
Trending in Agra

जंग लगी सरिया और घटिया ईंटें: सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में निर्माण पर सवाल, 51 करोड़ से बन रहे तीन स्कूलों की तस्वीर चौंकाएगी

आगरा में 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण पर सवाल उठे हैं। निरीक्षण में जंग लगी सरिया, मानकविहीन ईंटें, तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी और धीमी निर्माण गति सामने आई। बीएसए ने तकनीकी जांच की मांग की है।


  • August 24, 2026
  • 1 minute
  • 10 Views
Image

आगरा। बच्चों के बेहतर भविष्य और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए बनाए जा रहे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों के निर्माण पर सवाल खड़े हो गए हैं। आगरा में करीब 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे तीन स्कूलों के स्थलीय निरीक्षण में जंग लगी सरिया और मानकविहीन ईंटों के इस्तेमाल की शिकायत सामने आई है। इतना ही नहीं, निर्माण स्थल पर तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी और काम की धीमी रफ्तार भी पाई गई।

मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने तीनों स्कूलों के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। अब तकनीकी जांच के बाद ही निर्माण सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता और मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट होगी।

तीन जगह बन रहे मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल

आगरा के पिनाहट के राठौटी, एत्मादपुर के बिरखनी और बरौली अहीर के धमौटा में इन स्कूलों का निर्माण चल रहा है।

राठौटी और बिरखनी में करीब 25-25 करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल बनाए जा रहे हैं। वहीं, धमौटा में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।

इन परियोजनाओं का निर्माण उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा कराया जा रहा है।

निरीक्षण में सामने आईं कई खामियां

28 जुलाई को जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्माणाधीन स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने टास्क फोर्स के साथ तीनों निर्माणाधीन स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति को लेकर कई सवाल सामने आए। निर्माण स्थल पर जंग लगी सरिया और मानकविहीन ईंटों के इस्तेमाल की स्थिति मिली। इसके अलावा मौके पर तकनीकी स्टाफ भी मौजूद नहीं मिला।

श्रमिकों की संख्या के मुकाबले निर्माण कार्य की रफ्तार भी धीमी पाई गई। इससे निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।

बीएसए ने डीएम से मांगी तकनीकी जांच

निरीक्षण के बाद बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तीनों स्कूलों के निर्माण की तकनीकी जांच कराने का अनुरोध किया है।

बीएसए ने बताया कि तीनों स्कूलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। प्राप्त निर्देशों के अनुसार आगे विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब तकनीकी जांच में यह देखा जाना अहम होगा कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है या नहीं। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी और प्रगति की भी जांच की जाएगी।

क्या है मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल की खासियत?

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक ही परिसर में आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यहां नर्सरी से कक्षा 12 तक की पढ़ाई की व्यवस्था प्रस्तावित है।

स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं के तहत:

  • स्मार्ट क्लासरूम
  • विज्ञान और रोबोटिक्स लैब
  • डिजिटल लाइब्रेरी
  • खेल का मैदान
  • मिनी स्टेडियम
  • मल्टीपरपज हॉल

जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं।

प्रत्येक विद्यालय में करीब 1,500 से 3,000 विद्यार्थियों के पढ़ने की व्यवस्था का लक्ष्य है।

करोड़ों के प्रोजेक्ट में गुणवत्ता सबसे अहम

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा का वातावरण देना है। ऐसे में इन भवनों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौते का कोई सवाल नहीं होना चाहिए।

जंग लगी सरिया, मानकविहीन ईंटों और तकनीकी निगरानी की कमी को लेकर उठे सवालों का जवाब अब तकनीकी जांच से मिलने की उम्मीद है। यदि जांच में निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों से कम पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

अब निगाहें तकनीकी जांच रिपोर्ट पर हैं। इसी रिपोर्ट से साफ होगा कि 51 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निर्माण मानकों का कितना पालन हुआ और सामने आई कमियों के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।


Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *