भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: एडीए के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार निलंबित, ठेकेदारों से मिलीभगत का आरोप
आगरा विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार को टेंडर में कथित भ्रष्टाचार और ठेकेदारों से मिलीभगत के आरोप में शासन ने निलंबित कर दिया।
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एडीए के अधिशासी अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिक) अनिल कुमार को निलंबित कर दिया गया है। शासन को मिली शिकायतों और जांच के बाद उन्हें टेंडर कार्यों में ठेकेदारों से सांठगांठ और मनमानी करने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।
टेंडर में धांधली की शिकायत शासन तक पहुंची
शासन को शिकायत मिली थी कि अधिशासी अभियंता अनिल कुमार अपने पद का कथित रूप से दुरुपयोग कर रहे हैं। शिकायत में टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, ठेकेदारों से मिलीभगत और नियमों की अनदेखी सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।
मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर इसकी जांच कराई गई। जांच में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
ठेकेदारों से सांठगांठ का आरोप
प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी. गुरुप्रसाद की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अधिशासी अभियंता को ठेकेदारों के साथ सांठगांठ कर टेंडर कार्यों में धांधली और मनमानी करने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।
मामले में केवल टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताएं ही सामने नहीं आईं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासनहीनता के आरोप भी जांच में पुष्ट हुए हैं। इसके बाद शासन ने विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया।
लखनऊ मंडल कार्यालय से संबद्ध किए गए
निलंबन के बाद अनिल कुमार को आयुक्त, लखनऊ मंडल के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियमों के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वहन भत्ता दिया जाएगा।
यह भत्ता आधे वेतन पर देय अवकाश वेतन के बराबर होगा। निलंबन अवधि में उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकती है।
एडीए में कार्रवाई से मचा हड़कंप
एडीए के अधिशासी अभियंता के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते अब संबंधित कार्यों और दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
शासन की इस कार्रवाई को सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका थी और टेंडर प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ।
फिलहाल अनिल कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।