राष्ट्रीय लोक अदालत में उमड़ी भीड़, दीवानी अदालत में दिखा मेले जैसा नजारा; 6.76 लाख मामलों का निस्तारण, वादकारियों को मिली बड़ी राहत
आगरा में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान 6.76 लाख मामलों का निस्तारण हुआ। 1.53 लाख मोटर वाहन चालानों का समाधान और 1,341 बैंक मामलों में करीब 11.98 करोड़ रुपये का समझौता हुआ।
आगरा। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण किया गया। आगरा के दीवानी परिसर और तहसील परिसरों में सुबह से ही वादकारियों की भीड़ जुटी रही। पूरे दिन अदालत परिसरों में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 6,76,335 मामलों का निस्तारण किया गया, जिससे वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों-लाखों लोगों को राहत मिली।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज संजय कुमार मलिक ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान विभिन्न न्यायालयों और विभागों ने मामलों के समाधान के लिए विशेष काउंटर लगाए।
6.76 लाख मामलों का हुआ समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत में पीड़ित पक्षों को कुल 10.95 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति दिलाई गई। जिला जज ने स्वयं चार मामलों का निस्तारण किया। वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों ने 1,365 अन्य वादों का निपटारा किया। इन मामलों में कुल 44.23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रामविलास ने भी 140 मामलों का निस्तारण किया। परिवार न्यायालयों में 86 मामलों का समाधान हुआ, जबकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सहित अन्य न्यायालयों ने 13,222 वादों का निपटारा किया।
जिला उपभोक्ता आयोग, स्थायी लोक अदालत और वाणिज्यिक न्यायालयों में भी 37 मामलों का समाधान किया गया।
1.53 लाख मोटर वाहन चालानों का निपटारा
राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्चुअल न्यायालय के माध्यम से बड़ी संख्या में यातायात चालानों का भी समाधान किया गया। 1.53 लाख मोटर वाहन चालानों का निपटारा हुआ। इससे उन वाहन स्वामियों को राहत मिली, जिनके लंबे समय से चालान लंबित थे।
इसके अलावा विभिन्न बैंकों से जुड़े 1,341 मुकदमा-पूर्व मामलों में करीब 11.98 करोड़ रुपये का समझौता कराया गया। इससे बैंक और संबंधित पक्षों के बीच विवादों को अदालत में मुकदमा चलने से पहले ही सुलझाने में मदद मिली।
बिजली बिल और चालान के समाधान के लिए उमड़ी भीड़
लोक अदालत में बिजली के बकाया बिल और वाहनों के चालान से जुड़े मामलों के समाधान के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। टोरेंट पावर लिमिटेड के काउंटर पर लोगों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ा। वहीं, ई-सेवा केंद्र पर चालान की चार्जशीट निकलवाने के लिए भी सुबह से शाम तक वादकारियों की लाइन लगी रही।
गोकुलपुरा निवासी नरेश कुमार ने बताया कि उनकी मां विमला देवी के नाम पर बिजली का कनेक्शन है। करीब दो साल पहले दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से दो लाख रुपये बकाया बिजली बिल का नोटिस दिया गया था। बिल जमा न होने पर कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद से परिवार पड़ोसियों की मदद से बिजली का इंतजाम कर रहा है।
दो लाख रुपये के बिजली बिल से परेशान दिव्यांग शिव सिंह
शमसाबाद के गांव बिसेरी निवासी दिव्यांग शिव सिंह भी लोक अदालत में राहत की उम्मीद लेकर पहुंचे। वह करीब दो लाख रुपये के बिजली बिल के समाधान की उम्मीद में किसी से मांगकर लाई गई व्हीलचेयर पर दीवानी परिसर पहुंचे थे।
हालांकि, उन्हें दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का काउंटर नहीं मिला। इससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। करीब 20 साल पहले पिता की मौत के बाद से शिव सिंह अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहते हैं। आर्थिक और शारीरिक परेशानियों के बीच दो लाख रुपये का बिजली बिल उनके लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।
12 साल से न्याय की उम्मीद में अदालत पहुंच रहीं थीं आरती
राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। ट्रांस यमुना निवासी आरती गुप्ता पिछले 12 वर्षों से न्याय की उम्मीद में अदालत के चक्कर लगा रही थीं। करीब 12 साल पहले उनके खिलाफ थाना एत्माद्दौला में बिजली चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
आरती के पति की करीब 30 साल पहले आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी और उनका बेटा भी अलग रहता है। ऐसे में पिछले कई वर्षों से वह अकेले ही कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रही थीं।
राष्ट्रीय लोक अदालत में जब उनकी परेशानी सामने आई तो विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट पवन श्रीवास्तव ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शमन शुल्क कम कर दिया। अधिवक्ताओं ने भी आरती की ओर से शमन शुल्क जमा कराने में मदद की।
लंबे समय से चल रहे मामले में मिली इस राहत ने आरती के लिए केवल आर्थिक बोझ ही कम नहीं किया, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिया कि कठिन परिस्थितियों में इंसानियत और संवेदनशीलता अभी भी मौजूद है।
एक दिन में हजारों लोगों को मिली राहत
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों को आपसी सहमति और समझौते के आधार पर जल्द निपटाना है। आगरा में हुए आयोजन में बड़ी संख्या में मामलों का समाधान होने से लोगों को लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिली।
6,76,335 मामलों का निस्तारण, 1.53 लाख चालानों का समाधान और करोड़ों रुपये के समझौतों ने राष्ट्रीय लोक अदालत को आगरा में राहत और समाधान का बड़ा मंच बना दिया।