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गणेश चतुर्थी 2026: आगरा में गोबर से बने गणपति की खास मांग, नगर निगम में 300 से 1800 रुपये तक की मूर्तियां

गणेश चतुर्थी 2026 पर आगरा नगर निगम में गाय के गोबर से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। 9 से 18 इंच की इन प्रतिमाओं की कीमत 300 से 1800 रुपये तक है और घर पर ही विसर्जन किया जा सकता है।


  • September 12, 2026
  • 1 minute
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आगरा: गणेश चतुर्थी 2026 को लेकर आगरा में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के बाजारों में गणपति बप्पा की आकर्षक प्रतिमाओं से रौनक बढ़ गई है। इस बार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गाय के गोबर से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

आगरा नगर निगम कार्यालय में गोमय गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए विशेष स्टॉल लगाया गया है। यहां श्रद्धालुओं को 9 से 18 इंच तक की गणपति प्रतिमाएं 300 रुपये से 1800 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके विसर्जन के लिए नदी या किसी अन्य जल स्रोत पर जाने की जरूरत नहीं है।

नगर निगम में उपलब्ध हैं गोमय गणेश प्रतिमाएं

गणेश चतुर्थी के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए नगर निगम कार्यालय में गोबर से बनी गणेश प्रतिमाओं की बिक्री शुरू की गई है। नगर निगम के गेट पर गोमय उत्पाद केंद्र स्थापित कराया गया है, जहां श्रद्धालु अपनी पसंद और पूजा स्थल के अनुसार प्रतिमा खरीद सकते हैं।

पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह के अनुसार, लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी की प्रतिमाओं के स्थान पर गाय के गोबर से बनी प्रतिमाओं को अपना सकते हैं। इन प्रतिमाओं को लव यू जिंदगी फाउंडेशन की ओर से तैयार कराया गया है।

घर पर ही कर सकते हैं गणपति का विसर्जन

गोमय गणेश प्रतिमाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनका पर्यावरण के अनुकूल होना है। इन प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं को नदी, तालाब या किसी अन्य जल स्रोत तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रतिमा का विसर्जन घर पर ही गमले, बाल्टी या किसी अन्य पात्र में पानी डालकर किया जा सकता है। प्रतिमा के पानी में घुलने के बाद बची सामग्री का इस्तेमाल पौधों और पेड़-पौधों के लिए खाद के रूप में किया जा सकता है।

इस तरह गणेश प्रतिमा की पूजा और विसर्जन की परंपरा को निभाने के साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।

300 से 1800 रुपये तक है कीमत

गोमय गणेश प्रतिमाएं अलग-अलग आकार में उपलब्ध हैं। नगर निगम कार्यालय में लगाए गए स्टॉल पर 9 इंच से लेकर 18 इंच तक की प्रतिमाएं रखी गई हैं।

इनकी कीमत 300 रुपये से शुरू होकर 1800 रुपये तक है। संचालक प्रांकुर जैन के अनुसार, नगर निगम कार्यालय में प्रतिमाओं की बिक्री शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक और रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक की जाएगी।

श्रद्धालु अपने घर, पूजा स्थल और आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग आकार की प्रतिमाएं खरीद सकते हैं।

मिट्टी के गणपति भी बने लोगों की पहली पसंद

गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही आगरा के प्रमुख बाजारों में भी गणपति प्रतिमाओं की खरीदारी शुरू हो गई है। खंदारी समेत कई क्षेत्रों में गणपति प्रतिमाओं की दुकानें सज चुकी हैं।

इस बार लोगों का रुझान पारंपरिक प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की तुलना में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की ओर अधिक दिखाई दे रहा है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ने के कारण मिट्टी के गणपति लोगों की पसंद बन रहे हैं।

खंदारी क्षेत्र में हर साल गणेश प्रतिमाओं की दुकान लगाने वाले दुकानदार अनुज के मुताबिक, इस बार ग्राहक पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनकी दुकान पर 120 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं।

दुकान पर पीतल और पीओपी की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं, लेकिन ग्राहकों की मांग मिट्टी से बनी मूर्तियों के लिए ज्यादा है।

घर पर आसान तरीके से हो सकता है मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन

मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ने की एक वजह उनका आसान विसर्जन भी है। श्रद्धालु घर पर ही पानी से भरे पात्र में प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। प्रतिमा के घुलने के बाद बची मिट्टी का इस्तेमाल गमलों में पौधे लगाने के लिए किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने लोगों से पीओपी की जगह गाय के गोबर से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और गोमय उत्पादों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

गणेश चतुर्थी जैसे धार्मिक पर्व के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश जोड़ने की यह पहल लोगों को इको-फ्रेंडली तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। आगरा में गोमय और मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि श्रद्धालु अब पूजा-पर्व के साथ पर्यावरण को लेकर भी अधिक जागरूक हो रहे हैं।

गणपति बप्पा मोरया!


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