काल बन चुके स्मार्ट सिटी के खुले नाले: आखिर कब ढकेंगे मौत के ये मुहाने? लगातार हादसों के बाद भी इंतजा
आगरा में 411 से ज्यादा छोटे-बड़े नाले हैं, लेकिन सिर्फ 18 किलोमीटर हिस्सा ढका है। खुले नालों से हादसों का खतरा बढ़ा, संगठनों और पार्षदों ने कवर कराने की मांग की।
आगरा। स्मार्ट सिटी आगरा में खुले नाले अब लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। शहर में 411 से ज्यादा छोटे-बड़े नाले हैं, लेकिन इनमें से केवल करीब 18 किलोमीटर हिस्से को ही ढका गया है। बाकी नाले कई इलाकों में खुले पड़े हैं, जहां आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है।
बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। जलभराव होने पर सड़क और नाले का अंतर दिखाई नहीं देता, जिससे बाइक सवारों, ऑटो चालकों और पैदल राहगीरों के नाले में गिरने का खतरा बढ़ जाता है। लगातार हादसों के बावजूद खुले नालों को ढकने की मांग पर अब औद्योगिक संगठनों और पार्षदों ने नगर निगम से तत्काल अभियान चलाने की मांग की है।
411 से ज्यादा नाले, सिर्फ 18 किलोमीटर हिस्सा कवर
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर 411 से अधिक नाले बताए जा रहे हैं। इनमें केवल 18 किलोमीटर हिस्से को ही कवर किया गया है। बड़ी संख्या में नाले अभी भी खुले हैं। कई जगह नालों की दीवारें या किनारे टूटे हुए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
औद्योगिक संगठनों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों के किनारे मौजूद खतरनाक नालों को प्राथमिकता के आधार पर ढका जाना चाहिए। इसके लिए प्री-कास्ट स्लैब का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नाले में गिरने की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ कचरा डालने की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।
औद्योगिक संगठनों ने उठाई आवाज
नेशनल चैंबर, एसोचैम, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल और मोतीगंज खाद्य व्यापार समिति सहित विभिन्न संगठनों ने खुले नालों को ढकने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि खुले नाले आगरा की छवि को भी प्रभावित कर रहे हैं और सबसे बड़ी चिंता लोगों की सुरक्षा को लेकर है।
नेशनल चैंबर के अध्यक्ष मनोज बंसल ने कहा कि खुले नाले शहर की छवि पर दाग की तरह हैं। उनके अनुसार, कई खुले नालों में हादसे हो चुके हैं और अब इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चैंबर की ओर से नालों को कवर कराने की मांग लगातार उठाई जा रही है।
नेशनल चैंबर के उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग ने कहा कि आबादी वाले क्षेत्रों में मौजूद नालों को तत्काल ढकने की जरूरत है। सफाई के साथ-साथ जन सुरक्षा के लिहाज से नालों को कवर करना जरूरी है।
चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने शाही कैनाल, मंटोला, महावीर नाला और भैंरो नाला सहित खतरनाक नालों को कवर कराने की मांग की। उनका कहना है कि नालों को ढकने से इनमें कचरा डालने की समस्या भी कम होगी।
पूर्व अध्यक्ष संजय गोयल ने धनौली, नरीपुरा, यूपीएसआईडीसी और फ्रीगंज समेत कई इलाकों के खुले नालों का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी खुले नाले लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
पार्षदों ने भी मांगा विशेष अभियान
खुले नालों की समस्या को लेकर नगर निगम के विभिन्न दलों के पार्षद भी आवाज उठा रहे हैं। बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने कहा कि नालों के चोक होने के कारण बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है। जलभराव के दौरान यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां खत्म हो रही है और नाला कहां है।
उन्होंने नगर निगम से अभियान चलाकर खतरनाक और जानलेवा नालों को ढकने की मांग की है।
नाई की मंडी के पार्षद सुहेल कुरैशी ने बताया कि क्षेत्र में कई नाले खुले और क्षतिग्रस्त हालत में हैं। इनके आसपास से गुजरने वाले लोगों के फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है। उन्होंने नालों की मरम्मत और उन्हें कवर कराने की जरूरत बताई।
केके नगर के पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी ने जनकपुरी आयोजन को देखते हुए हाईवे से लेकर क्षेत्र के अंतिम छोर तक नाले को प्री-कास्ट स्लैब से ढकने की मांग की है।
वहीं प्रकाश नगर के पार्षद अरविंद मथुरिया ने बताया कि क्षेत्र में खुले नालों में ऑटो और बाइक सवारों के गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस संबंध में नगर आयुक्त को पत्र भी दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कई स्थानों पर स्लैब नहीं रखे गए हैं।
बारिश में बढ़ जाता है हादसे का खतरा
आगरा में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पहले से ही लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है। ऐसे में खुले नाले खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। पानी भरने के बाद नाले दिखाई नहीं देते और सड़क समझकर वाहन चालक आगे बढ़ जाते हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, नालों की केवल सफाई ही पर्याप्त नहीं है। जहां आबादी, बाजार, स्कूल, औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख सड़कें हैं, वहां सुरक्षा के लिहाज से नालों को कवर करना भी जरूरी है।
सफाई के साथ कवरिंग की जरूरत
स्थानीय संगठनों और पार्षदों की मांग है कि नगर निगम खतरनाक नालों की सूची तैयार करे और चरणबद्ध तरीके से उनकी सफाई, मरम्मत और कवरिंग कराए। विशेष रूप से उन नालों को प्राथमिकता दी जाए जहां पहले हादसे हो चुके हैं या जहां भारी आबादी रहती है।
प्री-कास्ट स्लैब से नालों को ढकने के साथ सफाई के लिए पर्याप्त जगह और निरीक्षण व्यवस्था भी रखी जा सकती है, ताकि भविष्य में नाले दोबारा चोक न हों।
अब सवाल यह है कि 411 से ज्यादा खुले नालों वाले शहर में नगर निगम कब तक स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाता है। लोगों की सुरक्षा के लिए सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई के बजाय पहले से खतरे वाले स्थानों को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित करना जरूरी है।