आगरा में फिल्म ‘बंटवारा’ के खिलाफ प्रदर्शन: योगी यूथ ब्रिगेड ने सनी देओल-आमिर खान के पोस्टर फूंके, बैन की मांग
आगरा में फिल्म ‘बंटवारा’ के खिलाफ योगी यूथ ब्रिगेड ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सनी देओल और आमिर खान के पोस्टर जलाकर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की।
आगरा। फिल्म ‘बंटवारा’ को लेकर आगरा में विरोध प्रदर्शन हुआ। योगी यूथ ब्रिगेड के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राजपुर चुंगी स्थित पन्ना सिनेमा पर फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर के नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने फिल्म को लेकर नारेबाजी की और इसे प्रतिबंधित करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने फिल्म के पोस्टर के साथ अभिनेता सनी देओल और फिल्म निर्माता आमिर खान के पोस्टर जलाकर अपना विरोध जताया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने दोनों अभिनेताओं के खिलाफ नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की।
हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने आरोप लगाया कि फिल्म में हिंदू समाज को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जबकि दूसरे समुदाय को बेहतर तरीके से दिखाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक, फिल्म में विभाजन की घटनाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
संगठन ने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर फिल्म के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया है और सरकार से फिल्म पर रोक लगाने की मांग की गई है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे भी लगाए।
क्या है फिल्म ‘बंटवारा’ की कहानी?
फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी सिकंदर मिर्जा (सनी देओल) और उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बंटवारे के दौरान लाहौर पहुंचते हैं।
सिकंदर और उसके परिवार को एक ऐसा घर मिलता है, जहां पहले से एक बुजुर्ग हिंदू महिला माई (शबाना आजमी) रहती हैं। माई अपना घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं होतीं। ऐसे में एक ही घर में रहने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनती है।
बदलते हालात के बीच सिकंदर और माई के रिश्ते में धीरे-धीरे बदलाव आता है। शुरुआत में एक-दूसरे के लिए परेशानी बने दोनों किरदार आगे चलकर भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़ते हैं और उनके बीच परिवार जैसा रिश्ता विकसित होता है।
फिल्म में सिकंदर की पत्नी हमीदा (प्रीति जिंटा) और अन्य किरदार भी विभाजन के दौर के डर, असुरक्षा और बदलते सामाजिक हालात को सामने लाते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ किरदारों के नजरिए में बदलाव दिखाई देता है।
फिल्म को लेकर जहां कहानी और भावनात्मक पक्ष पर चर्चा हो रही है, वहीं आगरा में इसके खिलाफ हुए प्रदर्शन ने इसे स्थानीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है।