नकली दवाओं का काला खेल: मोबाइल की हिस्ट्री साफ, दवाएं जलाकर नष्ट कीं; डिलीट डेटा खोलेगा बड़ा राज
धनौली नकली दवा मामले में यमुना किनारे दवाएं जलाने के वीडियो मिले।
आगरा: धनौली में करीब पांच करोड़ रुपये की नकली दवाओं की बरामदगी के बाद जांच में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए आरोपी के मोबाइल फोन से यमुना किनारे दवाओं को जलाकर नष्ट करने के वीडियो और फोटो मिले हैं। जांच में मोबाइल से कुछ डाटा डिलीट किए जाने की बात भी सामने आई है। अब डिलीट डाटा की रिकवरी के लिए मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल में मिले वीडियो और फोटो में यमुना किनारे दवाओं को नष्ट करते हुए दिखाया गया है। एक वीडियो में दवाओं पर डीजल डाला जा रहा है, जबकि दूसरे वीडियो में उन्हें आग लगाते हुए देखा जा सकता है। पुलिस के मुताबिक, ये वीडियो 27 सितंबर की रात के बताए जा रहे हैं।
टेढ़ी बगिया के गोदाम से दवाएं लाने की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यमुना किनारे जलाकर नष्ट की गई दवाएं टेढ़ी बगिया स्थित गोदाम से लाई गई थीं। जांच के दौरान गोदाम मालिक ने बताया कि गोदाम पवन कुमार को किराये पर दिया गया था। बताया गया है कि 27 सितंबर को ही गोदाम खाली कर चाबी वापस कर दी गई थी।
इसी आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गोदाम से दवाएं कब और कैसे निकाली गईं और उन्हें यमुना किनारे ले जाकर नष्ट करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
डिलीट चैट और डेटा की होगी फॉरेंसिक जांच
पुलिस को आरोपी के मोबाइल में कुछ डेटा डिलीट किए जाने के संकेत मिले हैं। अब फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि मोबाइल से कौन-कौन से फोटो, वीडियो, चैट और अन्य जानकारी हटाई गई है।
जांच एजेंसियां उन मोबाइल नंबरों की भी पड़ताल करेंगी, जिन पर दवाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई थी। डिलीट डेटा की रिकवरी से नकली दवाओं की खरीद, बिक्री और सप्लाई से जुड़े लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
धनौली में पांच करोड़ की दवाएं बरामद
बीते मंगलवार को धनौली क्षेत्र में एक अवैध गोदाम पर कार्रवाई के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये की दवाएं बरामद की गई थीं। बरामद दवाओं में देश-विदेश की नामी कंपनियों के नाम से तैयार की गई दवाएं शामिल बताई गई हैं। कार्रवाई के दौरान इसरार और सलुआ उर्फ मुकीम को पकड़ा गया था, जबकि मामले में फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन को भी पुलिस ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। इससे मामले में नकली दवाओं के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
घनी आबादी में भी हो सकते हैं नकली दवाओं के गोदाम
पुलिस और औषधि विभाग की टीम को आशंका है कि नकली दवाओं को रखने के लिए घनी आबादी वाले इलाकों में छोटे-छोटे गोदाम बनाए गए हो सकते हैं। आरोपियों से पूछताछ के साथ ऐसे संभावित ठिकानों की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद दवाओं के अलावा कहीं और भी नकली दवाओं का भंडारण तो नहीं किया जा रहा था।
नामी कंपनियों के नाम पर तैयार की गई थीं दवाएं
औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा के अनुसार, छापे के दौरान मधुमेह, थायराइड, कैंसर, हृदय रोग और एलर्जी समेत कई बीमारियों से संबंधित करीब 14 प्रकार की दवाएं जब्त की गई थीं। ये दवाएं देश-विदेश की नामी कंपनियों के नाम से तैयार की गई थीं।
अधिकारी के मुताबिक, नकली दवाएं मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसी दवाएं बीमारी के इलाज में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सकती हैं। बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर मामले में संबंधित धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
पुलिस जुटा रही साक्ष्य
डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह ने बताया कि नकली दवाओं के मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त रूप से जांच कर रही है। विवेचक मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है।
अब पुलिस की नजर आरोपी के मोबाइल में मिले वीडियो, फोटो और डिलीट किए गए डेटा पर है। फॉरेंसिक जांच के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि नकली दवाओं को नष्ट करने और उनके नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।