विश्व रेबीज दिवस: कुत्ता काटे तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, तुरंत उठाएं ये कदम; वरना जा सकती है जान
आगरा में 27 सितंबर तक जानवरों के काटने के 1.32 लाख मामले सामने आए। गंभीर घाव वाले 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाया गया।
आगरा। शहर और जिले में निराश्रित कुत्तों के हमले लगातार चिंता का कारण बने हुए हैं। इस साल 27 सितंबर तक जानवरों के काटने के 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें गंभीर घाव वाले 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाया गया। चिकित्सकों के अनुसार कुत्तों के काटने के मामलों में चेहरे और गर्दन पर गंभीर घाव के मामले भी सामने आए हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि कुत्ता या कोई अन्य संक्रमित जानवर काटने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से करीब 15 मिनट तक धोने के बाद चिकित्सकीय सलाह लें और समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाएं।
27 सितंबर तक 1.32 लाख मरीज पहुंचे
नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति के अनुसार, रेबीज एक जूनोटिक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैल सकती है। उन्होंने बताया कि जानवरों के काटने के मामलों में करीब 99 फीसदी मामले कुत्तों के काटने से जुड़े हैं।
जिले में पिछले साल करीब 1.80 लाख लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्लियों ने काटा था। इस साल 27 सितंबर तक 1.32 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें गंभीर स्थिति वाले 2,661 मरीजों को एंटी रेबीज सीरम की जरूरत पड़ी।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में सिर्फ चार मरीजों को एंटी रेबीज सीरम लगाया गया था, जबकि पिछले साल यह संख्या बढ़कर 411 हो गई थी। इस साल सितंबर तक यह आंकड़ा 2,661 पहुंच चुका है।
निराश्रित कुत्तों के हमले ज्यादा
जिला अस्पताल की एंटी रेबीज वैक्सीन ओपीडी के प्रभारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि पिछले साल अस्पताल में जानवरों के काटने के 3,619 मरीज पहुंचे थे। इनमें 2,390 मरीजों को निराश्रित कुत्तों ने काटा था, जबकि 273 लोग पालतू कुत्तों के हमले में घायल हुए।
इसके अलावा 740 मरीज बंदर के काटने और 183 मरीज बिल्ली के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे थे। अन्य मरीजों में चूहा, सियार समेत दूसरे जानवरों के काटने के मामले शामिल थे।
कुत्ता काटे तो तुरंत करें ये काम
चिकित्सकों के मुताबिक कुत्ता काटने के बाद घाव को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। प्राथमिक तौर पर:
- घाव को साबुन और बहते पानी से करीब 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
- चिकित्सकीय सलाह के अनुसार घाव की देखभाल करें और तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाएं।
- वैक्सीन की पूरी निर्धारित डोज समय पर लगवाना जरूरी है।
- घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के भरोसे इलाज में देरी न करें।
रेबीज के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
रेबीज के शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारी जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन संक्रमण बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। संभावित लक्षणों में जी मचलना, बुखार, सिरदर्द, बेचैनी, घबराहट, चिंता, उलझन, नींद में परेशानी, हाइड्रोफोबिया (पानी से डर), मुंह से अत्यधिक लार आना और असामान्य व्यवहार शामिल हो सकते हैं।
जानवर के काटने के बाद समय पर चिकित्सकीय उपचार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीनेशन कराना बेहद महत्वपूर्ण है