20 की उम्र में हड्डियां क्यों हो रहीं कमजोर? युवाओं में बढ़ रहा फ्रैक्चर का खतरा, इन आदतों से तुरंत बनाएं दूरी
आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के सर्वे में युवाओं में कमजोर हड्डियों की चिंता सामने आई। जानिए हड्डियों की कमजोरी के कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय।
आगरा। कम उम्र में हड्डियों की कमजोरी अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी (AOS) के एक सर्वे में युवाओं की हड्डियों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सर्वे में 30 साल से कम उम्र के 38.3 फीसदी युवाओं में हड्डियों का घनत्व कमजोर पाया गया। वहीं, सभी आयु वर्गों को मिलाकर करीब 60.6 फीसदी लोगों में बोन डेंसिटी सामान्य से कम मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक धूप और व्यायाम से दूरी, पौष्टिक भोजन की कमी, फास्टफूड की बढ़ती आदत और बदलती जीवनशैली युवाओं की हड्डियों पर असर डाल सकती है।
1704 लोगों की हुई बोन मिनरल डेंसिटी जांच
आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी ने बोन एंड ज्वाइंट माह के तहत अगस्त में पार्क, कॉलेज, सरकारी विभागों, सोसाइटी और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) की जांच की। इसमें 16 साल से लेकर 70 साल से अधिक उम्र के कुल 1704 लोगों को शामिल किया गया।
सर्वे के अनुसार करीब 60.3 फीसदी यानी 1033 लोगों में हड्डियों का घनत्व -1 से कम पाया गया। इनमें लगभग 54 फीसदी लोगों में ऑस्टियोपीनिया और 6.6 फीसदी में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा सामने आया।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि 30 साल से कम उम्र के 38.3 फीसदी युवाओं में हड्डियों की ताकत अपेक्षाकृत कम पाई गई।
युवतियों में भी सामने आई हड्डियों की कमजोरी
सर्वे में कम उम्र की युवतियों में हड्डियों की कमजोरी का आंकड़ा युवकों की तुलना में अधिक रहा। 30 साल से कम उम्र की 125 युवतियों की जांच में 37.6 फीसदी की बोन डेंसिटी कमजोर पाई गई। वहीं, 42 युवकों में यह आंकड़ा 35.7 फीसदी रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई युवा हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी परेशानी को सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार दर्द, सूजन या बार-बार चोट लगने की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
काम का दबाव और खराब लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार
आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के विशेषज्ञों के मुताबिक 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, नियमित पैदल न चलना, पर्याप्त धूप न लेना और संतुलित आहार की कमी जैसी आदतें समस्या को बढ़ा सकती हैं।
सर्वे में बड़ी संख्या में कामकाजी युवा भी शामिल रहे। बदलती दिनचर्या के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होने से हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत प्रभावित हो सकती है।
फास्टफूड और बढ़ता वजन भी चिंता का कारण
दाल, हरी सब्जियां, मोटे अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की जगह पिज्जा, बर्गर, पेटीज, मोमोज और कोल्ड ड्रिंक जैसे फास्टफूड का बढ़ता सेवन भी चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर को मजबूत हड्डियों के लिए पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसके साथ ही बढ़ता वजन घुटनों और अन्य जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
हड्डियों की सेहत बेहतर रखने के लिए जीवनशैली में छोटे लेकिन जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं:
- रोजाना नियमित पैदल चलें और शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं।
- सुबह की धूप पर्याप्त मात्रा में लें, लेकिन अपनी त्वचा और मौसम के अनुसार सावधानी रखें।
- दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और मोटे अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
- फास्टफूड और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
- छोटी दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का विकल्प अपनाएं।
- लगातार हड्डी या जोड़ में दर्द, सूजन अथवा बार-बार फ्रैक्चर होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
- डॉक्टर की सलाह पर जरूरत होने पर BMD जांच कराई जा सकती है।
युवाओं को अभी से सावधान होने की जरूरत
हड्डियों की मजबूती केवल उम्र बढ़ने के बाद ध्यान देने वाला विषय नहीं है। किशोरावस्था और युवावस्था में संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के सर्वे से सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि युवाओं को अपनी हड्डियों की सेहत को लेकर अभी से जागरूक होने की जरूरत है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर भविष्य में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।