आगरा नगर निगम की लापरवाही ने ली बुजुर्ग की जान: हादसे के लिए 4 अफसर जिम्मेदार, पार्षद ने पहले ही नाला ढकने की मांग की थी
आगरा के केदार नगर में जलभराव के दौरान खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग ओम प्रकाश देवानी की मौत हो गई। 6 महीने पहले पार्षद ने नाला ढकने की मांग की थी।
आगरा। शुक्रवार रात बारिश के बाद हुए जलभराव के दौरान खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग ओम प्रकाश देवानी की मौत हो गई। केदार नगर निवासी ओम प्रकाश राजकमल इंटर कॉलेज के पास जलभराव के बीच साइकिल समेत खुले नाले में गिर गए थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें नाले से बाहर निकाला और परिजनों को सूचना दी। कुछ देर बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव और खुले नाले की समस्या बनी हुई थी। यदि समय रहते नाले को सुरक्षित किया जाता और जलभराव की समस्या का समाधान किया जाता तो हादसा टाला जा सकता था।
बारिश में सड़क और खुले नाले के बीच फर्क करना मुश्किल
जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां नाला खुला हुआ है। एक ओर सड़क और दूसरी ओर खाली मैदान है। नाले के किनारे सुरक्षा के लिए बाउंड्री या कोई अन्य ठोस व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सामान्य दिनों में नाले में पानी दिखाई देता है, लेकिन बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने से सड़क, नाला और आसपास का खाली मैदान एक जैसा नजर आने लगता है। ऐसे में राहगीरों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि नाला किस जगह है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में इस क्षेत्र में करीब 2 से 3 फीट तक पानी भर जाता है। जलभराव के बीच खुले नाले की मौजूदगी राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन जाती है।
काम से घर लौट रहे थे ओम प्रकाश
ओम प्रकाश देवानी शुक्रवार रात काम खत्म कर साइकिल से अपने घर लौट रहे थे। बारिश शुरू होने के बाद वह रास्ते में रुक गए थे। बारिश बंद होने के बाद रात करीब सवा 11 बजे वह राजकमल इंटर कॉलेज के पास पहुंचे।
सड़क पर पानी भरा होने के कारण उन्हें सामने मौजूद खुले नाले का पता नहीं चला। इसी दौरान वह साइकिल समेत नाले में गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और परिजनों को सूचना दी।
परिजन उन्हें घर ले गए, लेकिन कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। रात करीब 12 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। शनिवार को परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
6 महीने पहले पार्षद ने नाला ढकने की मांग की थी
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब खुले नाले को लेकर पहले ही शिकायत और मांग की जा चुकी थी, तो उसे सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।
केदार नगर के पार्षद गुड्डू मेनन के मुताबिक, उन्होंने करीब छह महीने पहले नगर निगम अधिकारियों से इस नाले को ढकने की मांग की थी। उनका कहना था कि बारिश के दौरान जलभराव होने पर खुले नाले की वजह से बड़ा हादसा हो सकता है।
पार्षद का आरोप है कि मांग के बावजूद नाले को ढकने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब बुजुर्ग की मौत के बाद यह पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है।
चार अधिकारियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
हादसे के बाद सफाई, नाला रखरखाव और क्षेत्र की निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चार अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं।
1. राजीव बालियान, जेडएसओ
लोहामंडी जोन के जेडएसओ राजीव बालियान के स्तर पर क्षेत्र की नियमित सफाई, नाला सफाई और रखरखाव की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारी बताई गई है। आरोप है कि खुले नाले की स्थिति के बावजूद इसे सुरक्षित करने या ढकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
2. डॉ. संजीव वर्मा, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा की जिम्मेदारी सफाई कर्मचारियों के माध्यम से नालों की सफाई और निगरानी से जुड़ी बताई गई है। आरोप है कि नाला सफाई अभियान के दौरान इस स्थान का प्रभावी निरीक्षण नहीं हुआ और खुले नाले की स्थिति को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया गया।
3. अशोक प्रिय गौतम, सहायक नगर आयुक्त
सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के स्तर से मशीनों के माध्यम से नालों की सफाई और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी बताई गई है। आरोप है कि नाला सफाई अभियान के दौरान यहां की स्थिति का पर्याप्त निरीक्षण नहीं हुआ और खुले नाले को सुरक्षित करने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश नहीं दिए गए।
4. संतोष कुमार वैश्य, नगर आयुक्त
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्रीय पार्षद की ओर से नाला ढकने की मांग किए जाने के बावजूद इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा केदार नगर की लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हादसे के बाद उठे कई सवाल
ओम प्रकाश की मौत के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि यदि खुले नाले और जलभराव की समस्या पहले से अधिकारियों के संज्ञान में थी, तो नाले को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।
बारिश के दौरान सड़क और नाले के बीच अंतर दिखाई नहीं देने की स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोग अब नाले को स्थायी रूप से ढकने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि इस हादसे के बाद नगर निगम खुले नालों की सुरक्षा और केदार नगर में जलभराव की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।