इसे कहते हैं अंधेरगर्दी: गाड़ी, पानी सब निगम का, फिर भी 68 लाख से गीली की गईं सड़कें; चौंकाने वाला खुलासा
आगरा नगर निगम के टैंकर और पानी से 800 किमी सड़कों पर रोज छिड़काव के नाम पर 68 लाख रुपये का बिल सामने आया। 209 रुपये प्रति किमी भुगतान पर लेखा विभाग ने आपत्ति जताई।
आगरा नगर निगम में सड़कों पर पानी के छिड़काव को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। निगम के अपने टैंकर और पानी इस्तेमाल होने के बावजूद 800 किलोमीटर तक रोज छिड़काव के नाम पर 68 लाख रुपये का बिल सामने आया है। 209 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किए जा रहे भुगतान पर लेखा विभाग ने भी आपत्ति जताई है। पार्षदों ने इस करार को फिजूलखर्ची बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है।
आगरा में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और सड़कों की धूल कम करने के लिए पानी के छिड़काव की व्यवस्था की गई है। आरोप है कि कागजों में हर दिन करीब 800 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। कई स्थानों पर सड़कें सूखी नजर आने का दावा किया गया है।
नगर निगम ने पानी के छिड़काव और डिवाइडर पर लगे पौधों को पानी देने के लिए दिल्ली-एनसीआर की फर्म जेके कंस्ट्रक्शन से करार किया है। इस करार के तहत निगम के 14 टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं और इनके संचालन के लिए कंपनी को 209 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाना है। कंपनी को मुख्य रूप से ड्राइवर और सीएनजी की व्यवस्था करनी है।
इसके अलावा दो टैंकर कंपनी ने अपने स्तर से लगाए हैं, जिनके लिए 290 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है। प्रत्येक वाहन के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 50 किलोमीटर का भुगतान निर्धारित है। इस व्यवस्था के आधार पर करीब 800 किलोमीटर प्रतिदिन छिड़काव का भुगतान किया जाना था।
68 लाख के बिल पर लेखा विभाग की आपत्ति
कंपनी की ओर से कुछ वाहनों के खराब होने और किलोमीटर के आधार पर करीब 68 लाख रुपये के भुगतान का बिल भेजा गया है। हालांकि इस बिल पर नगर निगम के लेखा विभाग ने आपत्ति लगाई है। अब भुगतान की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वाहन नगर निगम के हैं और पानी की व्यवस्था भी निगम की है, तो इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है। वहीं, जमीनी स्तर पर छिड़काव की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कई प्रमुख सड़कों पर दूसरे विभाग की जिम्मेदारी
शहर की सभी सड़कों पर छिड़काव की जिम्मेदारी नगर निगम की फर्म के पास भी नहीं है। आगरा में यूपीएमआरसी की ओर से मेट्रो के दो कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। कैंट से कालिंदी विहार और ताजमहल से सिकंदरा के बीच करीब 29.4 किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य चल रहा है। इन क्षेत्रों में छिड़काव की जिम्मेदारी यूपीएमआरसी की बताई गई है।
एमजी रोड, माल रोड, फतेहाबाद रोड, खंदारी, प्रतापपुरा और कैंट जैसे क्षेत्रों में भी मेट्रो निर्माण के चलते छिड़काव की व्यवस्था यूपीएमआरसी से जुड़ी है।
वहीं, सीएम ग्रिड के तहत करीब 12 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों पर निर्माण कार्य चल रहा है। इन स्थानों पर भी छिड़काव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। नेशनल हाईवे पर पानी के छिड़काव की जिम्मेदारी एनएचएआई की है।
पार्षदों ने बताया फिजूलखर्ची
पीपलमंडी के पार्षद रवि माथुर ने इस करार पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि जब नगर निगम के पास अपने टैंकर हैं, तो केवल ड्राइवर और अन्य संचालन के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करना उचित नहीं है।
भाजपा के उपनेता पार्षद दल प्रकाश केसवानी ने भी करार को फिजूलखर्ची बताया। उनका कहना है कि निगम अपने कर्मचारियों से टैंकर चलवाए तो हर महीने बड़ी बचत हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कई जगह पानी का छिड़काव होते हुए नहीं देखा।
नगर आयुक्त बोले- पहले पूरी जानकारी लेंगे
मामले पर नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने कहा कि वह लखनऊ में बैठक के लिए आए हुए हैं। करार किस आधार पर किया गया और भुगतान की व्यवस्था क्या है, इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद ही जांच या अन्य कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
अब देखना होगा कि 68 लाख रुपये के बिल पर लेखा विभाग की आपत्ति के बाद नगर निगम इस करार और छिड़काव के दावों की किस तरह जांच करता है। सवाल सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि कागजों में दर्ज 800 किलोमीटर प्रतिदिन के छिड़काव और जमीन पर उसकी वास्तविक स्थिति का भी है।