आगरा में औषधि विभाग की बड़ी लापरवाही! जब्त अवैध दवाएं खुले में फेंकीं, सुरक्षा पर उठे सवाल
आगरा में 20 साल पहले जब्त की गई अवैध दवाएं खुले में फेंकी मिलीं। बारिश में दवाएं खराब हो रही हैं। औषधि विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
आगरा। आगरा में औषधि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 20 साल पहले छापेमारी के दौरान जब्त की गईं फिजीशियन सैंपल, हॉस्पिटल सप्लाई समेत अन्य दवाएं खुले में पड़ी मिली हैं। बारिश के कारण ये दवाएं भीगकर खराब हो रही हैं। दवाओं को खुले में किसने फेंका, इसकी जांच अब औषधि विभाग द्वारा कराई जा रही है।
मामला सीएमओ कार्यालय से जुड़ा है, जहां लंबे समय से औषधि विभाग की जब्त दवाएं तीन कमरों में रखी हुई हैं। इन कमरों का इस्तेमाल करीब 15 साल से नहीं हो पा रहा है। अब सीएमओ कार्यालय इन कमरों को खाली कराकर दूसरे काम में लेना चाहता है, जिसके बाद पुराने मामलों और दवाओं की स्थिति सामने आई है।
2007 में लिए गए थे तीन कमरे
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2007 में सिकंदरा स्थित कैलाशपुरी के हेल्थ वर्कर ट्रेनिंग सेंटर में औषधि विभाग द्वारा जब्त की गई दवाओं को रखने के लिए तीन कमरे लिए गए थे। वर्ष 2015 तक छापेमारी के दौरान जब्त की गई दवाएं इन्हीं कमरों में रखी जाती रहीं।
इसके बाद सीएमओ कार्यालय का संचालन इसी परिसर से होने लगा। वर्ष 2015 के बाद औषधि विभाग द्वारा जब्त की जाने वाली दवाओं को नौबरी, मधु नगर स्थित स्थान पर रखा जाने लगा। हालांकि पुराने मामलों में जब्त दवाएं अब भी पुराने कमरों में मौजूद हैं।
कोर्ट में पेश की जाती हैं पुरानी जब्त दवाएं
पुराने मामलों की कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त औषधि निरीक्षक इन कमरों में रखी दवाओं को निकालकर संबंधित मामलों में साक्ष्य के तौर पर अदालत में पेश करते हैं। हालांकि कई मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और केस भी खत्म हो चुके हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसी दवाएं अब भी कमरों में पड़ी हैं, जिन्हें नष्ट किया जाना है। आरोप है कि इन दवाओं को उचित तरीके से नष्ट करने के बजाय कमरों के बाहर गैलरी और खुले स्थान में फेंक दिया गया।
बारिश में भीगकर नष्ट हो रही दवाएं
खुले में पड़ी दवाएं बारिश के संपर्क में आने से खराब हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब्त की गई अवैध या संदिग्ध दवाओं को सुरक्षित रखने और नियमानुसार निस्तारित करने की जिम्मेदारी किसकी है।
मामले में यह भी जांच का विषय है कि इन दवाओं को कमरों से निकालकर खुले में किसने रखा और क्या इसके लिए विभाग की ओर से कोई अनुमति या प्रक्रिया अपनाई गई थी।
औषधि विभाग ने मांगी रिपोर्ट
सहायक औषधि आयुक्त अरविंद गुप्ता ने बताया कि मामले में औषधि निरीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवाओं को खुले में किसने रखा और इसके पीछे क्या कारण था।
वहीं, प्रभारी सीएमओ डॉ. अमित रावत का कहना है कि तीन कमरे औषधि विभाग के पास हैं। दवाओं को हटाने के लिए विभाग को पत्र लिखा जा रहा है, ताकि इन कमरों का इस्तेमाल सीएमओ कार्यालय के काम के लिए किया जा सके।
अब सवाल यह है कि वर्षों से बंद कमरों में पड़ी जब्त दवाओं के निस्तारण में इतनी देरी क्यों हुई और खुले में दवाएं फेंकने के लिए जिम्मेदार कौन है? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।