आस्था की मिसाल बनेंगी महिलाएं: हरिद्वार से पैदल कांवड़ लाकर राजेश्वर महादेव का करेंगी जलाभिषेक
सावन के पावन महीने में आगरा की महिलाएं भी कांवड़ यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी। परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मनोकामना पूर्ति के लिए वे हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर आएंगी और राजेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगी।
सावन 2026: महिलाएं भी उठाएंगी कांवड़, हरिद्वार से पैदल गंगाजल लाकर राजेश्वर महादेव का करेंगी जलाभिषेक
आगरा। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष आगरा की महिलाएं भी आस्था, साहस और संकल्प का अनूठा उदाहरण पेश करने जा रही हैं। परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए उन्होंने हरिद्वार से पैदल कांवड़ यात्रा कर पवित्र गंगाजल लाने का संकल्प लिया है। यात्रा पूरी करने के बाद वे राजेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक करेंगी।
कांवड़ यात्रा को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है। उनका कहना है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, ऐसे में आस्था और धार्मिक परंपराओं के इस कठिन मार्ग पर भी वे पीछे नहीं रहना चाहतीं। कंधों पर गंगाजल से भरी कांवड़ और होठों पर "बम-बम भोले" तथा "हर-हर महादेव" के जयकारों के साथ वे पूरी श्रद्धा से पैदल यात्रा करेंगी।
'महिलाएं किसी से कम नहीं'
बिचपुरी निवासी निशा उप्रेती बताती हैं कि जब महिलाएं शिक्षा, खेल, प्रशासन और हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं, तो कांवड़ यात्रा जैसे कठिन धार्मिक अनुष्ठान में भी उनकी भागीदारी स्वाभाविक है। उनका कहना है कि इस बार कांवड़ मार्ग पर महिलाओं का उत्साह और शिवभक्ति लोगों के लिए प्रेरणा बनेगी।
परिवार की खुशहाली के लिए लिया संकल्प
राजपुर चुंगी निवासी रेखा गोस्वामी ने बताया कि कई वर्षों से वह पुरुष श्रद्धालुओं को कांवड़ लाते हुए देखती थीं। इस बार उन्होंने भी परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर राजेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने का संकल्प लिया है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी यात्रा सफल और मंगलमय होगी।
आधुनिकता के साथ संस्कृति से जुड़ाव जरूरी
राजीव नगर की पूजा गोस्वामी का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली के साथ अपनी धार्मिक परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहना भी उतना ही आवश्यक है। वह लंबे समय से कांवड़ यात्रा करना चाहती थीं और इस सावन उनकी यह इच्छा पूरी होने जा रही है। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की है कि पूरी यात्रा बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हो।
सावन के दौरान महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह संदेश देती है कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक है। इस बार कांवड़ मार्ग पर महिलाओं की मौजूदगी श्रद्धा के साथ-साथ सामाजिक बदलाव की भी एक सकारात्मक तस्वीर पेश करेगी।