अलौकिक दर्शन को रहें तैयार: रजत हिंडोले पर विराजेंगे बाबा मनःकामेश्वरनाथ, सर्पों के सिंहासन पर होगा भव्य शृंगार
सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ 23 और 24 अगस्त को रजत हिंडोले पर विराजमान होंगे। सर्पों के सिंहासन और विशेष श्रृंगार के साथ भक्तों को अलौकिक दर्शन होंगे।
आगरा। सावन मास की एकादशी और द्वादशी पर शिवनगरी आगरा में बाबा मनःकामेश्वरनाथ के प्राचीन रजत हिंडोला उत्सव की परंपरा एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। 23 और 24 अगस्त को बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन देंगे। वर्ष में केवल दो दिन होने वाले इस विशेष दर्शन को लेकर मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शिव और शक्ति के आनंदमय मिलन का प्रतीक है हिंडोला उत्सव
महंत योगेश पुरी के अनुसार, ब्रज क्षेत्र में सावन आते ही झूला उत्सव की परंपरा शुरू हो जाती है। इसी परंपरा की आध्यात्मिक छटा आगरा की शिवनगरी में भी देखने को मिलती है। सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
मान्यता है कि भगवान शिव का हिंडोले पर विराजना शिव और शक्ति, प्रकृति और परमात्मा के आनंदमय संबंध का प्रतीक है। यही कारण है कि इस विशेष दर्शन का भक्तों में अलग ही उत्साह रहता है।
सर्पों के सिंहासन पर सजेगा बाबा का दिव्य स्वरूप
मठ मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि इस बार बाबा मनःकामेश्वरनाथ का विशेष श्रृंगार बेहद आकर्षक होगा। बाबा को सर्पों के मुकुट और सर्पों के सिंहासन के साथ सजाया जाएगा। रजत हिंडोले में सर्प और बिच्छुओं की आकृतियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
हिंडोले के दोनों ओर भगवान शिव के प्रिय गण कालभैरव और वीरभद्र रजत स्वरूप में विराजमान रहेंगे। पूरा श्रृंगार भगवान शिव के दिव्य और रहस्यमयी स्वरूप को दर्शाएगा।
23 अगस्त को शाम से होंगे विशेष दर्शन
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 23 अगस्त रविवार को शाम 7 बजे से रात 10:30 बजे तक श्रद्धालु बाबा मनःकामेश्वरनाथ के रजत हिंडोला दर्शन कर सकेंगे। वहीं 24 अगस्त सोमवार को सुबह से रात 12 बजे तक दर्शन का क्रम जारी रहेगा।
विशेष दर्शन को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचने की उम्मीद है। भक्त बाबा के रजत हिंडोले के दर्शन के साथ जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
1978-79 में तैयार हुआ था रजत हिंडोला
बाबा मनःकामेश्वरनाथ के रजत हिंडोला उत्सव की परंपरा कई दशक पुरानी है। महंत योगेश पुरी ने बताया कि वर्ष 1978-79 में पूर्व महंत उद्धव पुरी महाराज ने रजत हिंडोले का निर्माण कराया था। इसके बाद से हर वर्ष सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा को रजत हिंडोले पर विराजमान कराने की परंपरा चली आ रही है।
वर्ष में केवल दो दिन मिलने वाले इन विशेष दर्शनों को लेकर भक्तों में विशेष आस्था है। सावन के पावन माह में रजत हिंडोले पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का अनूठा अवसर बनेगा।
दर्शन का समय
- 23 अगस्त: शाम 7:00 बजे से रात 10:30 बजे तक
- 24 अगस्त: सुबह से रात 12:00 बजे तक
- विशेष आकर्षण: रजत हिंडोला, सर्पों का सिंहासन, सर्पों का मुकुट, कालभैरव और वीरभद्र के रजत स्वरूप