एसएन मेडिकल कॉलेज में दवाओं का संकट: मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रहीं महंगी दवाएं, कई जरूरी दवाएं स्टॉक से बाहर
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में कई जरूरी दवाओं की कमी से मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में दवा आपूर्ति प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इन दिनों कई आवश्यक दवाओं की कमी से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। विशेष रूप से पेट रोग, हड्डी रोग और त्वचा रोग विभाग में उपचार कराने आने वाले मरीजों को डॉक्टरों द्वारा पर्चे पर लिखी सभी दवाएं अस्पताल के दवा काउंटर से नहीं मिल पा रही हैं। इसके चलते मरीजों को शेष दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उनके इलाज का खर्च बढ़ गया है।
सबसे अधिक प्रभावित हैं ये विभाग
बुधवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 2,996 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें मेडिसिन विभाग में 622, हड्डी रोग विभाग में 326 और त्वचा रोग विभाग में 230 मरीजों ने उपचार कराया। इन विभागों में वायरल फीवर, पेट दर्द, लिवर संबंधी बीमारियां, गठिया, जोड़ों का दर्द, फंगल संक्रमण, एलर्जी और बाल झड़ने जैसी समस्याओं के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
अस्पताल में इन्हीं बीमारियों से संबंधित कई दवाओं का स्टॉक कम होने के कारण मरीजों को पूरी दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
मरीजों की बढ़ी जेब पर मार
दवा काउंटर से अधूरी दवाएं मिलने के बाद मरीजों को शेष दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
- पिनाहट निवासी सोनू ने बताया कि वह अपने बेटे के साथ त्वचा रोग का इलाज कराने आए थे। अस्पताल में सभी दवाएं नहीं मिलीं, जिसके कारण उन्हें करीब 650 रुपये की दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ीं।
- जगदीशपुरा निवासी अमीना ने बताया कि उनका पेट और लिवर का इलाज एसएन में चल रहा है, लेकिन हर बार कुछ दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
- रामबाग निवासी रामप्रकाश ने कहा कि अस्पताल में केवल कुछ सस्ती दवाएं ही मिलती हैं, जबकि कई महंगी दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मौसमी बीमारियों और बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त दवाओं की खरीद के लिए ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है। आपूर्ति में देरी होने के कारण फिलहाल कुछ दवाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले सप्ताह तक नई दवाओं की खेप अस्पताल पहुंच जाएगी, जिसके बाद मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं अस्पताल से ही उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मरीजों को राहत का इंतजार
सरकारी अस्पताल में मुफ्त या रियायती इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए दवाओं की कमी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गई है। अब मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में दवाओं की नियमित उपलब्धता का इंतजार है, ताकि उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदने की मजबूरी से राहत मिल सके।