logo logo
logo logo

Contact Information

Branch office:- Shop 10 38/4A Basement, block Samriddhi building, near balaji juice ,J&k bank and Yes bank, Sanjay Palace, Sanjay Place, Civil Lines, Agra, Uttar Pradesh 282002

Call: +91 6399 505 060

agratrends@gmail.com
Trending in Agra

आठ रुपये के इंट्राकैथ का MRP ₹380, यूरिन बैग की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे; अस्पतालों के लंबे बिल पर सवाल

आगरा के निजी अस्पतालों में सर्जिकल सामान की MRP और थोक कीमतों में 4600% तक के अंतर का दावा सामने आया है। इंट्राकैथ, सिरिंज और यूरिन बैग की कीमतों को लेकर सवाल उठे हैं।


  • September 18, 2026
  • 1 minute
  • 12 Views
Image

आगरा। निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को उपचार के साथ-साथ सर्जिकल सामान और दवाओं के नाम पर भी भारी बिल का सामना करना पड़ सकता है। एक पड़ताल में सिरिंज, ग्लव्स, इंट्राकैथ, आईवी सेट और यूरिन बैग जैसे सर्जिकल सामान के थोक रेट और MRP के बीच बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। कुछ मामलों में यह अंतर 4600 प्रतिशत तक बताया गया है।

मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद पहले दिन से ही सर्जिकल सामान और जरूरी दवाओं की जरूरत शुरू हो जाती है। इसके बाद उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाले सामान की संख्या बढ़ती जाती है, जिससे कुल बिल भी बढ़ सकता है।

₹8 के इंट्राकैथ की MRP ₹380

पड़ताल में एक इंट्राकैथ का थोक रेट करीब ₹8 बताया गया, जबकि उसकी MRP ₹380 तक दर्ज मिली। इस आधार पर MRP और थोक कीमत के बीच करीब 4600 प्रतिशत का अंतर बताया गया है।

हालांकि MRP और अस्पताल या मेडिकल स्टोर के वास्तविक बिक्री मूल्य में अंतर को सीधे "मुनाफा" मानना उचित नहीं है। इसके लिए खरीद लागत, वितरण, कर, अस्पताल की लागत और लागू मूल्य-नियमन नियमों को भी देखना आवश्यक है।

केस 1: आर एंड आर हॉस्पिटल

सेक्टर चार, आवास विकास कॉलोनी स्थित आर एंड आर हॉस्पिटल में संचालित आरएस मेडिकल स्टोर पर आईवी सेट और इंट्राकैथ सहित कुछ सर्जिकल सामान खरीदे गए।

बताया गया कि ₹225 MRP वाला आईवी सेट ₹40 में दिया गया, जबकि ₹190 MRP वाला इंट्राकैथ ₹30 में मिला। अन्य सामान लेने के बाद सादे कागज पर बिल दिया गया। पक्का बिल मांगने पर ग्राहक से यह भी पूछा गया कि वह सामान कहां इस्तेमाल करने वाला है।

केस 2: जीवन ज्योति हॉस्पिटल

सेक्टर वन स्थित जीवन ज्योति हॉस्पिटल की फार्मेसी में ₹90 MRP वाला ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेट ₹35 में दिए जाने की बात सामने आई।

पांच एमएल की सिरिंज की MRP ₹5 थी और दो सिरिंज ₹10 में दी गईं। वहीं ₹90 MRP वाला इंट्राकैथ ₹30 में दिया गया। भुगतान नकद करने के लिए कहा गया और इसके बाद पक्का बिल दिया गया। बिल में MRP, बिक्री मूल्य तथा SGST और CGST के सामने शून्य दर्ज होने की बात कही गई।

केस 3: पुष्पांजलि हॉस्पिटल

पुष्पांजलि हॉस्पिटल में संचालित मेडिकल स्टोर पर सर्जिकल सामान का पर्चा देने के बाद कर्मचारियों ने पूछा कि मरीज अस्पताल में भर्ती है या नहीं। ड्रेसिंग के लिए सामान लेने की बात बताने पर सामान उपलब्ध कराया गया।

यहां ₹380 MRP वाला इंट्राकैथ ₹51.15 में दिया गया। यूरोबैग की MRP ₹397 थी, जबकि इसे ₹48.71 में देने की बात सामने आई। बिल में MRP और बिक्री मूल्य के साथ पांच प्रतिशत GST भी लगाया गया तथा ₹6 का डिस्काउंट दिया गया।

ICU में एक दिन का खर्च ₹5,000 से ₹10,000 तक

आगरा जिले में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल संचालित हैं और कई अस्पतालों के भीतर ही मेडिकल स्टोर या फार्मेसी मौजूद हैं। मरीज के भर्ती होने के बाद ग्लव्स, सिरिंज, कैथेटर, आईवी सेट और अन्य सर्जिकल सामान के साथ दवाओं की जरूरत पड़ती है।

बताई गई जानकारी के अनुसार शुरुआती स्तर पर ₹500 से ₹1,500 तक का सामान और दवाएं मंगाई जा सकती हैं। ICU में भर्ती मरीज के लिए 24 घंटे के दौरान सर्जिकल सामान और दवाओं का खर्च ₹5,000 से ₹10,000 तक पहुंचने का दावा किया गया है। वास्तविक खर्च मरीज की बीमारी, उपचार और इस्तेमाल किए गए सामान के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

बाहर से सामान लाने पर वापस करने का आरोप

कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें सर्जिकल सामान और दवाएं अस्पताल के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर से ही लेने के लिए कहा जाता है। जब मरीज के तीमारदार बाहर के मेडिकल स्टोर या थोक विक्रेता से सामान लेकर पहुंचते हैं, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाता।

एक थोक दवा कारोबारी के हवाले से बताया गया कि उन्हें करीब ₹8 के थोक रेट वाला इंट्राकैथ ₹50 में उपलब्ध कराया गया। उन्होंने अस्पताल के बाहर से सामान खरीदने की कोशिश की, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही।

MRP और थोक कीमत के अंतर पर उठ रहे सवाल

सर्जिकल सामान की MRP और थोक कीमत के बीच अंतर का मुद्दा केवल आगरा तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन से जुड़े अधिकारी तुकाराम मुंढे द्वारा सोशल मीडिया पर सर्जिकल सामान की MRP और थोक कीमतों से संबंधित सर्वे के आंकड़े साझा किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

इस तरह के मामलों में यह सवाल उठता है कि किसी मेडिकल उत्पाद की MRP किस आधार पर निर्धारित होती है और मरीज से वसूली जाने वाली अंतिम कीमत कितनी पारदर्शी है।

सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर से सुनवाई

मेडिकल सामान और दवाओं की कीमतों से जुड़े मुद्दे को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता एवं पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने की जानकारी दी गई है। 20 जुलाई की सुनवाई के दौरान मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाओं के बिल भी प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई।

याचिका में दवाओं और सर्जिकल सामान की कीमतों में थोक तथा खुदरा स्तर पर होने वाले अंतर और MRP निर्धारण से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले में 22 सितंबर से आगे की बहस शुरू होने की बात कही गई है।

मरीजों के लिए बिल की पारदर्शिता अहम

अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें इस्तेमाल किए गए सर्जिकल सामान और दवाओं का आइटम-वाइज बिल उपलब्ध कराया जाए। किसी सामान की कीमत असामान्य लगने पर उसके पैक पर दर्ज MRP, निर्माता, बैच नंबर और बिल में दर्ज बिक्री मूल्य की जांच की जा सकती है।

सर्जिकल सामान की MRP, थोक कीमत और अस्पताल द्वारा वसूली गई राशि में अंतर होने मात्र से अनियमितता साबित नहीं होती। किसी मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह संबंधित उत्पाद, मूल्य-निर्धारण व्यवस्था, बिल और लागू कानूनों की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है।

निजी अस्पतालों में इलाज की बढ़ती लागत के बीच सर्जिकल सामान और दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता मरीजों और उनके परिजनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।


Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *