सांसों पर गहराया संकट: आगरा की हवा क्यों हुई जहरीली? चार साल में सबसे खराब हाल, AQI 164 पहुंचा
आगरा में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो गई है। 8 सितंबर को AQI 164 पहुंच गया, जो चार वर्षों में सबसे खराब स्तर है। निर्माण कार्य, सड़क खुदाई और धूल के कारण कई इलाकों में PM-10 का स्तर बढ़ा।
आगरा। ताजनगरी में बारिश के मौसम के बावजूद हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता बढ़ा रही है। 8 सितंबर 2026 को आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 164 दर्ज किया गया, जो पिछले चार वर्षों में इसी तारीख के आसपास दर्ज स्तरों में सबसे अधिक है। स्मार्ट सिटी के पर्यावरण सेंसरों से मिले आंकड़ों ने शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण की स्थिति को और स्पष्ट किया है।
स्मार्ट सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में लगाए गए 39 पर्यावरण सेंसरों से मिले आंकड़ों में सभी स्थानों पर पीएम-10 की मात्रा बढ़ी मिली। इनमें करीब 10 हॉटस्पॉट ऐसे रहे, जहां वायु गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब दर्ज की गई।
संजय प्लेस बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
शहर में सबसे ज्यादा असर संजय प्लेस में देखने को मिला। यहां मेट्रो निर्माण कार्य के कारण धूल और मिट्टी के कणों की मात्रा बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में यहां धूल का गुबार तीन गुना से अधिक बढ़ गया है।
मानसून के दौरान बारिश के कारण आमतौर पर धूल के कणों में कमी आती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग नजर आई। मंगलवार को पीएम कणों की मात्रा अधिकतम 271 तक पहुंच गई। बारिश के मौसम में सामान्य तौर पर यह स्तर 50 से 70 के बीच रहने की उम्मीद की जाती है।
संजय प्लेस में पीएम कणों का औसत स्तर भी करीब 171 रहा, जिसका सीधा असर क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर पड़ा।
इन इलाकों में भी बढ़ा प्रदूषण
सिर्फ संजय प्लेस ही नहीं, बल्कि शहर के कई अन्य प्रमुख इलाकों में भी निर्माण और सड़क खुदाई के कारण धूल प्रदूषण बढ़ने की बात सामने आई है।
दिल्ली गेट, आगरा फोर्ट, धूलियागंज, नया पुल तिराहा समेत कई स्थानों पर निर्माण गतिविधियों और सड़कों की खुदाई से पीएम-10 कणों की मात्रा बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग स्टेशन के आंकड़ों के अनुसार पीएम-2.5 की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन निर्माण कार्य और सड़क खुदाई से निकलने वाली धूल में बड़े आकार के कण यानी पीएम-10 ज्यादा पाए गए।
मेट्रो और सड़क खुदाई बनी बड़ी वजह
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण के अनुसार एमजी रोड पर इस साल मेट्रो का काम शुरू हुआ है। निर्माण गतिविधियों का असर वायु गुणवत्ता पर पड़ा है। इसके अलावा शहर में सीएम ग्रिड समेत कई परियोजनाओं के तहत सड़कें खोदी जा रही हैं, जिससे धूल का स्तर बढ़ रहा है।
निर्माण स्थलों पर पर्याप्त धूल नियंत्रण न होने की स्थिति में हवा में पीएम-10 की मात्रा और बढ़ सकती है।
स्मार्ट सिटी के 39 में 12 सेंसर खराब
प्रदूषण की निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी की ओर से लगाए गए 39 पर्यावरण सेंसरों में से 12 सेंसर खराब बताए गए हैं। इसके अलावा मेट्रो के निर्माण कार्य के दौरान सदर के अल्लाबख्श और राजामंडी क्षेत्र में लगे सेंसर भी हटवा दिए गए।
सेंसर खराब होने और कुछ स्थानों से हटाए जाने के कारण शहर के सभी इलाकों से वास्तविक समय के प्रदूषण आंकड़े जुटाना भी चुनौती बन रहा है।
चार साल में AQI का सबसे खराब स्तर
संजय प्लेस में 8 सितंबर को दर्ज AQI के आंकड़े बताते हैं कि इस साल स्थिति कितनी बदली है:
| वर्ष | AQI |
|---|---|
| 2026 | 164 |
| 2025 | 52 |
| 2024 | 71 |
| 2023 | 79 |
एक साल में AQI का 52 से बढ़कर 164 पहुंचना शहर में वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
अगले साल के लिए बनेगी सुधार की योजना
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता के मुताबिक मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले साल के लिए अभी से सुधार की योजनाएं तैयार की जाएंगी। निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण, सड़क खुदाई वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन और प्रदूषण निगरानी को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
आगरा में बढ़ता पीएम-10 स्तर अब सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं रह गया है। मानसून में AQI 164 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि निर्माण और सड़क खुदाई से निकलने वाली धूल पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। शहर की हवा को साफ रखने के लिए प्रशासन के साथ-साथ निर्माण एजेंसियों और नागरिकों की भी जिम्मेदारी अहम होगी।