Agra: बचपन बचाने की मुहिम शुरू, 77 बाल श्रमिकों की पहचान; डीएम ने रेस्क्यू और पुनर्वास के दिए निर्देश
आगरा में बाल श्रम और बाल विवाह के खिलाफ अभियान तेज हुआ। 77 बाल श्रमिकों की पहचान, 8 मामलों में परिवाद दाखिल। डीएम ने रेस्क्यू और पुनर्वास के निर्देश दिए।
आगरा को बाल श्रम और बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिले में अब तक खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे 77 बाल श्रमिकों की पहचान की गई है। इनमें से आठ मामलों में परिवाद दाखिल किया जा चुका है, जबकि अन्य मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने चिह्नित बच्चों को रेस्क्यू कर शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ उनका पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बाल श्रम में लिप्त 77 बच्चों की पहचान
मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक हुई। इसमें बच्चों के संरक्षण और उनके पुनर्वास के लिए अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि जिले में विभिन्न खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे 77 बाल श्रमिकों को चिह्नित किया गया है। इनमें से आठ मामलों में परिवाद दाखिल किए गए हैं, जबकि अन्य मामलों में नोटिस जारी कर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
भिक्षावृत्ति और बाल विवाह के मामलों में भी कार्रवाई
प्रशासन की ओर से भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान भी चलाया जा रहा है। अभियान के तहत आठ बच्चों का रेस्क्यू किया गया है। वहीं, बाल विवाह से जुड़े चार मामलों में कार्रवाई की गई है।
डीएम मनीष बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को केवल रेस्क्यू करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य के लिए पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू किए गए और संकटग्रस्त बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से तत्काल जोड़ा जाए। इसके लिए बच्चों के पुनर्वास की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने को कहा गया है।
उन्होंने ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर गठित समितियों को निर्देश दिए कि निराश्रित और संकटग्रस्त बच्चों की पहचान कर उनका विवरण अनिवार्य रूप से रजिस्टर में दर्ज किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा शिक्षा और जरूरी सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे।
काउंसिलिंग और फॉलोअप पर जोर
डीएम ने बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से बच्चों की नियमित काउंसिलिंग और फॉलोअप कराने के निर्देश भी दिए। इसका उद्देश्य बच्चों को दोबारा बाल श्रम या अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जाने से रोकना है।
प्रशासन का जोर बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के साथ उन्हें शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर है।
थानों में नामित होंगे बाल कल्याण पुलिस अधिकारी
बैठक में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। सभी थानों में नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा बच्चों के रेस्क्यू और सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए पोस्टर और पंपलेट के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराने को कहा गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, डीपीओ अतुल सोनी, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का लक्ष्य
आगरा को बाल श्रम और बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए प्रशासन अब पहचान, रेस्क्यू, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास—चारों स्तरों पर कार्रवाई को मजबूत करने की तैयारी में है। 77 बाल श्रमिकों की पहचान के बाद अब प्रशासन के सामने इन बच्चों को सुरक्षित भविष्य और शिक्षा से जोड़ने की चुनौती है।