आगरा में अब जानलेवा नहीं रहेंगे खुले नाले, 140 नालों को कवर करने की तैयारी
आगरा में खुले नालों में गिरने से एक साल में तीन लोगों की मौत के बाद नगर निगम ने 140 संवेदनशील नालों को 114.14 करोड़ रुपये से कवर करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
आगरा। शहर में खुले नालों में गिरने से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले एक साल में खुले नालों में गिरने से तीन लोगों की मौत के बाद नगर निगम प्रशासन ने शहर के सभी नालों की सुरक्षा ऑडिट कराई है। ऑडिट में चिह्नित किए गए संवेदनशील नालों को सुरक्षित करने की योजना तैयार की गई है।
नगर निगम अब 114.14 करोड़ रुपये की लागत से 140 नालों को कवर कराने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है। इसके साथ ही खुले और संवेदनशील नालों के किनारे जल्द ही बैरिकेडिंग कराई जाएगी, ताकि लोगों को नालों में गिरने से बचाया जा सके।
आगरा में 410 नाले, लंबाई 324 किलोमीटर
शहर में नगर निगम के अंतर्गत कुल 410 नाले हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 324 किलोमीटर है। इनमें 18 बड़े, 251 मध्यम और 141 छोटे नाले शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक बड़े नालों की लंबाई करीब 34 किलोमीटर, जबकि मध्यम नालों की लंबाई लगभग 200 किलोमीटर है। कई स्थानों पर नाले खुले होने के कारण बारिश के दौरान खतरा और बढ़ जाता है। जलभराव की स्थिति में खुले नाले दिखाई नहीं देते, जिससे पैदल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
एक साल में तीन लोगों की मौत के बाद गंभीर हुआ मामला
खुले नालों की समस्या कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा हाल की घटनाओं से लगाया जा सकता है। चार सितंबर को केदारनगर नाले में डूबने से शंकरगढ़ की पुलिया निवासी ओम प्रकाश की मौत हो गई थी। इससे पहले भी एक महिला और एक बच्चे की खुले नाले में गिरने से जान जा चुकी है।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद नगर आयुक्त संतोष कुमार ने शहर के सभी नालों की सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को यह ऑडिट पूरा हो गया। करीब आधा दर्जन टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में नालों का सर्वे किया और खुले तथा संवेदनशील नालों को चिह्नित किया।
चारों जोन में चिह्नित हुए 140 नाले
सुरक्षा ऑडिट के बाद नगर निगम ने चारों जोन में कुल 140 नालों को प्राथमिकता के आधार पर कवर कराने के लिए चिह्नित किया है।
- छत्ता जोन: 32 नाले
- लोहामंडी जोन: 26 नाले
- ताजगंज जोन: 35 नाले
- हरीपर्वत जोन: 47 नाले
इन नालों को चरणबद्ध तरीके से कवर कराया जाएगा। नगर निगम का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।
पहले बैरिकेडिंग, फिर कवर होंगे नाले
नालों को स्थायी रूप से कवर करने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। ऐसे में नगर निगम ने तत्काल सुरक्षा के लिए खुले नालों के किनारे बैरिकेडिंग कराने की तैयारी की है। इससे लोगों को खुले नालों के आसपास जाने से रोका जा सकेगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी।
खासकर वे नाले प्राथमिकता में रहेंगे, जो मुख्य सड़कों, पुलियों, बाजारों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास हैं।
इन प्रमुख नालों को किया जाएगा सुरक्षित
छत्ता जोन
छत्ता जोन में टेढ़ी बगिया चौराहे से रामबाग चौराहे और हाथरस रोड तक का नाला, शहादरा-जसवंत नगर का माता मंदिर नाला, ट्रांस यमुना कॉलोनी में चार सैयद से अप्सरा टॉकीज पुलिया तक का नाला और नवलगंज में स्टेशन रोड से बाबा मंदिर तक का नाला शामिल है।
हरीपर्वत जोन
बुढ़ान सैय्यद बस्ती नाला, लोखंडे की चौकी स्थित हनुमान मंदिर के पास का नाला, चौरंगा मंदिर से नगला पदी मुख्य मार्ग का नाला, सरला बाग चौराहे से बाइपास चौराहे और आगरा पब्लिक स्कूल से पालीवाल पार्क चौराहे तक का नाला भी सुरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा रजवाड़ा क्षेत्र में वाल्मीकि पुलिया से गिर्राज नगर मोड़ तक के नाले को भी योजना में शामिल किया गया है।
ताजगंज जोन
ताजगंज जोन में बैकुंठी देवी स्कूल के सामने का नाला, ख्वासपुरा क्षेत्र का नाला, शहीद नगर पुलिस चौकी से डबल पेट्रोल पंप तक का नाला, इंदिरापुरम सौ फुटा रोड से बैंक कॉलोनी-डॉ. राय स्कूल तक का नाला, मधुनगर मुख्य मार्ग तथा मुगल पुलिया से गोबर चौकी सब्जी मंडी तक के नाले को सुरक्षित किया जाएगा।
लोहामंडी जोन
लोहामंडी में सेक्टर चार पुलिस चौकी के सामने से सेंट्रल पार्क तक का नाला, कारगिल पेट्रोल पंप से ईंट मंडी तक का नाला, आवास विकास में बैनारा फैक्ट्री के सामने का नाला, जगदीशपुरा खतैना नाला और सेक्टर चार पुलिस चौकी से सेक्टर 11 शनिदेव मंदिर तक का नाला योजना में शामिल है।
सुरक्षा के लिहाज से अहम फैसला
नगर निगम की यह योजना शहर में खुले नालों से होने वाले हादसों को रोकने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। यदि शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और काम तय समय पर पूरा होता है तो शहर के 140 संवेदनशील नालों को सुरक्षित किया जा सकेगा।
हालांकि नालों को कवर करने के साथ उनकी नियमित सफाई, रखरखाव और स्लैब की मजबूती की निगरानी भी जरूरी होगी, ताकि भविष्य में नाले दोबारा लोगों के लिए खतरा न बनें।