आगरा में स्कूल-मंदिर से महज 20 फीट दूर बनेगा कचरा ट्रांसफर स्टेशन, मेयर के शिलान्यास पर उठे सवाल
आगरा के जीवनी मंडी में स्कूल और हनुमान मंदिर से महज 20 फीट दूर 80 टन क्षमता का कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया जा रहा है। ₹7.10 करोड़ की परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों ने दुर्गंध और हादसे के खतरे की आशंका जताई है।
आगरा: जीवनी मंडी वाटरवर्क्स के पास हनुमान मंदिर और दो सरकारी स्कूलों से महज 20 फीट की दूरी पर 80 टन क्षमता का कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों ने जगह चयन पर सवाल उठाते हुए परियोजना का विरोध किया है। लोगों का कहना है कि स्कूल और धार्मिक स्थल के इतने करीब कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनने से दुर्गंध, गंदगी और हादसों का खतरा बढ़ सकता है।
बृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों के विरोध के बीच मेयर हेमलता दिवाकर ने 7.10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन और वाशिंग स्टेशन का शिलान्यास किया। यह स्टेशन जीवनी मंडी वाटरवर्क्स और आस्था सिटी सेंटर के बीच नाले के किनारे सिंचाई विभाग की जमीन पर प्रस्तावित है।
10 वार्डों का कचरा पहुंचेगा ट्रांसफर स्टेशन
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मेयर हेमलता दिवाकर ने बताया कि नए ट्रांसफर स्टेशन के माध्यम से छत्ता जोन के 10 वार्डों से निकलने वाले कचरे को कुबेरपुर भेजा जाएगा। घर-घर से कूड़ा एकत्र करने वाली छोटी गाड़ियां पहले यहां कचरा लेकर आएंगी। इसके बाद मशीनों की मदद से कचरे को बड़े वाहनों में ट्रांसफर कर कुबेरपुर भेजा जाएगा।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से कचरा लेकर कुबेरपुर जाने वाले वाहनों की संख्या कम होगी। इससे वाहनों की आवाजाही और ईंधन की खपत में भी कमी आने की उम्मीद है।
वाशिंग स्टेशन की भी होगी सुविधा
परियोजना में वाशिंग स्टेशन भी बनाया जाएगा। पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण के अनुसार, यहां स्वच्छता कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की नियमित सफाई और रखरखाव किया जा सकेगा। नगर निगम का दावा है कि इससे सफाई व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
शिलान्यास कार्यक्रम में नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य, एसएफआई सुदेश यादव, पार्षद राकेश जैन, शरद चौहान, हेमंत प्रजापति, अनुज जैन, निशांत सिंह और ऋषभ गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अनुराग चतुर्वेदी ने किया।
स्कूल और मंदिर की नजदीकी को लेकर विरोध
परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी आपत्ति इसकी लोकेशन को लेकर है। एक्टिविस्ट संजय दीक्षित के साथ क्षेत्रीय लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि प्रस्तावित स्टेशन दोनों सरकारी स्कूलों और हनुमान मंदिर के बेहद करीब है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल और प्रस्तावित ट्रांसफर स्टेशन के बीच करीब 20 फीट का रास्ता है। उनका कहना है कि प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा यहां पहुंचने से दुर्गंध की समस्या पैदा हो सकती है, जिसका सीधा असर आसपास के विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों पर पड़ सकता है।
लोगों ने यह भी आशंका जताई कि कचरा लेकर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
डीएम और कमिश्नर से शिकायत की तैयारी
स्थानीय लोगों ने परियोजना की जगह पर दोबारा विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन के लिए ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए, जहां स्कूल, मंदिर और घनी आबादी प्रभावित न हो।
विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि वे इस मामले को जिलाधिकारी और मंडलायुक्त के सामने भी उठाएंगे। अब सवाल यह है कि 7.10 करोड़ रुपये की इस परियोजना के निर्माण से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों और प्रस्तावित स्थान की उपयुक्तता पर प्रशासन किस तरह विचार करता है।
फिलहाल, नगर निगम की ओर से परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया जारी है, जबकि स्थानीय लोगों का विरोध जगह चयन को लेकर बढ़ता दिखाई दे रहा है।