डीजे की तेज आवाज से जान का खतरा! ब्रुगाडा सिंड्रोम और LQTS मरीजों के लिए बड़ा जोखिम
डीजे की तेज आवाज ब्रुगाडा सिंड्रोम और LQTS टाइप-2 मरीजों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ा सकती है।
आगरा। शादी समारोह, जन्मदिन की पार्टी और धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज में बजने वाला डीजे कुछ लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर ब्रुगाडा सिंड्रोम और लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (LQTS) टाइप-2 से पीड़ित मरीजों में तेज आवाज और अचानक होने वाले शोर से दिल की धड़कन अनियंत्रित होने तथा कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है।
मेरठ में प्रसूता और बलरामपुर में कक्षा दो की छात्रा की मौत के मामलों के बाद तेज आवाज वाले म्यूजिक सिस्टम को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य लोगों में तेज आवाज से सीधे कार्डियक अरेस्ट का खतरा नहीं माना जाता, लेकिन कुछ आनुवंशिक हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ब्रुगाडा सिंड्रोम में क्यों खतरनाक है तेज आवाज?
ब्रुगाडा सिंड्रोम एक आनुवंशिक हृदय संबंधी बीमारी है, जिसमें हृदय की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कई मरीजों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते।
तेज आवाज, तनाव और तेज बुखार जैसे ट्रिगर कुछ मरीजों में हृदय की धड़कन को अनियमित कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में अचानक बेहोशी, दौरे और कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ब्रुगाडा सिंड्रोम से जुड़ी प्रमुख बातें
करीब 70 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई दे सकते हैं।
हृदय के सोडियम चैनल से जुड़े जीन में म्यूटेशन इसका एक कारण हो सकता है।
लगभग 10 हजार में पांच लोगों में यह आनुवंशिक बीमारी पाई जा सकती है।
30 से 50 वर्ष की उम्र में इसके मामले अधिक देखे जा सकते हैं।
अचानक बेहोशी, चक्कर आना और दौरे इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं।
LQTS टाइप-2 में भी सावधानी जरूरी
लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (LQTS) टाइप-2 भी आनुवंशिक हृदय संबंधी समस्या है। इसमें हृदय की विद्युत गतिविधि प्रभावित होने के कारण दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक LQTS टाइप-2 से पीड़ित कुछ लोगों में अचानक तेज आवाज, भावनात्मक तनाव या किसी अप्रत्याशित घटना से हृदय की लय बिगड़ने का खतरा हो सकता है।
LQTS टाइप-2 के संभावित लक्षण
करीब 80 प्रतिशत मामलों में स्पष्ट लक्षण नहीं हो सकते।
जीन में म्यूटेशन के कारण यह समस्या हो सकती है।
लगभग पांच हजार में एक व्यक्ति में यह समस्या होने का अनुमान बताया जाता है।
10 से 30 वर्ष की उम्र में इसके मामले अधिक देखे जा सकते हैं।
चक्कर आना, अचानक बेहोशी, घबराहट, तेज धड़कन और दौरे संभावित लक्षण हो सकते हैं।
कितनी तेज आवाज हो सकती है नुकसानदायक?
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बहुत तेज आवाज में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। डीजे और बड़े म्यूजिक सिस्टम की आवाज कई बार 100 डेसिबल से ऊपर पहुंच सकती है। अत्यधिक तेज आवाज से सुनने की क्षमता को नुकसान होने के साथ शरीर में तनाव और हृदय गति बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
दिए गए स्वास्थ्य मानकों के अनुसार:
50 डेसिबल तक की आवाज सामान्य तौर पर नुकसानदायक नहीं मानी जाती।
60 से 80 डेसिबल से अधिक आवाज में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए।
90 डेसिबल की आवाज में लंबे समय तक रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
100 डेसिबल की आवाज में कम समय के लिए भी सावधानी जरूरी है।
गर्भवती महिलाओं को भी बरतनी चाहिए सावधानी
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा सिंह के अनुसार, यदि गर्भवती महिला या प्रसूता को कोई आनुवंशिक हृदय बीमारी नहीं है तो केवल तेज आवाज के कारण कार्डियक अरेस्ट का खतरा सामान्य तौर पर नहीं माना जाता। हालांकि, लंबे समय तक अत्यधिक तेज आवाज में रहने से बचना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान अपेक्षाकृत कम और आरामदायक स्तर की आवाज में संगीत सुनना बेहतर है।
विशेषज्ञ ने क्या कहा?
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ नागर के अनुसार, ब्रुगाडा सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों में तेज आवाज और तेज बुखार जैसे ट्रिगर हृदय की धड़कन को अनियंत्रित कर सकते हैं, जिससे गंभीर स्थिति में कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। वहीं LQTS टाइप-2 में तेज आवाज या अचानक भावनात्मक झटके से भी हृदय की लय प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य लोगों में तेज आवाज को लेकर कार्डियक अरेस्ट का खतरा इस तरह से नहीं माना जाता, लेकिन अत्यधिक तेज आवाज से सभी लोगों को बचना चाहिए और आयोजनों में निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
क्या सावधानी बरतें?
डीजे या म्यूजिक सिस्टम के बिल्कुल पास खड़े होने से बचें।
लंबे समय तक अत्यधिक तेज आवाज में न रहें।
ब्रुगाडा सिंड्रोम या LQTS जैसी आनुवंशिक हृदय बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
अचानक बेहोशी, चक्कर, दौरे या तेज/अनियमित धड़कन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित ध्वनि स्तर और समय संबंधी नियमों का पालन किया जाना चाहिए।