यूपी: आगरा में बन रहा नया बाईपास, इन 6 गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक; आसमान छुएंगे जमीनों के दाम
आगरा में कुबेरपुर से टूंडला के बीच 900 करोड़ रुपये की लागत से 16 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास प्रस्तावित है। परियोजना के लिए छह गांवों की चिह्नित जमीनों की खरीद-बिक्री और भू-उपयोग में बदलाव रोकने के लिए एनएचएआई ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
आगरा। आगरा और टूंडला के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 900 करोड़ रुपये की लागत से 16 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास प्रस्तावित है। इस परियोजना को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रस्तावित बाईपास के लिए चिह्नित छह गांवों की प्रभावित जमीनों की खरीद-बिक्री, भू-उपयोग में बदलाव और भूमि की प्रकृति बदलने पर रोक लगाने के लिए एनएचएआई ने जिलाधिकारी आगरा को पत्र भेजा है।
यह परियोजना एत्मादपुर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर कुबेरपुर से टूंडला के बीच प्रस्तावित है। बाईपास के निर्माण से आगरा-टूंडला मार्ग पर यातायात का दबाव कम होने और वाहन चालकों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
छह गांवों की जमीन पर रहेगी नजर
प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास परियोजना से नवलपुर, धरेरा, सुहगरा, मुस्तकिल, रहनकलां और धीरा गांवों की चिह्नित जमीनें प्रभावित होंगी। एनएचएआई ने इन जमीनों की खरीद-बिक्री और भू-उपयोग में बदलाव रोकने के लिए प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
इस कदम का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान अवैध प्लॉटिंग, अनधिकृत निर्माण और जमीन के रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर को रोकना है। इससे परियोजना के लिए निर्धारित भूमि की स्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया
एनएचएआई के परियोजना निदेशक राहुल सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3(क) के तहत अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित प्रभावित गाटों का विवरण भूमिराशी पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।
प्रभावित भूमि स्वामियों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास संबंधी लाभ दिए जाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
जमीन की रजिस्ट्री रोकने के निर्देश देने का अनुरोध
एनएचएआई अधिकारियों ने तहसील प्रशासन, उपजिलाधिकारी एत्मादपुर और निबंधन विभाग से प्रभावित जमीनों के संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। साथ ही राजस्व अभिलेखों में जरूरी प्रविष्टियां दर्ज कराने पर जोर दिया गया है, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान अनधिकृत बैनामे और निर्माण की आशंका को कम किया जा सके।
जाम से मिलेगी राहत, दिल्ली-कानपुर का सफर होगा आसान
कुबेरपुर से टूंडला के बीच प्रस्तावित 16 किलोमीटर लंबा बाईपास आगरा और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। आगरा-टूंडला मार्ग पर व्यस्त चौराहों और घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने के कारण अक्सर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और लंबा जाम लग जाता है।
करीब 900 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का प्राथमिक सर्वे पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी गजट अधिसूचना जारी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
बाईपास का निर्माण पूरा होने के बाद स्थानीय यातायात को बेहतर विकल्प मिलने के साथ दिल्ली और कानपुर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी राहत मिल सकती है। इससे यात्रा का समय कम करने और क्षेत्र में सड़क संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नोट: परियोजना की निर्माण समयसीमा और भूमि अधिग्रहण की अंतिम स्थिति आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।