करवा चौथ 2026: सुहागिनों का महापर्व आज, जानें शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का सही समय
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जानें पूजा विधि, व्रत कथा और सोलह श्रृंगार का महत्व।
आगरा। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। उत्तर भारत में यह त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को करवा माता की पूजा करती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन करवा माता के साथ मां पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व
करवा चौथ के दिन सोलह श्रृंगार करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस अवसर पर महिलाएं लाल, गुलाबी और अन्य शुभ रंगों के पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, बिछिया और अन्य श्रृंगार की वस्तुओं से सजती-संवरती हैं।
मान्यता है कि सोलह श्रृंगार सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक है। कई महिलाएं इस दिन अपनी शादी का जोड़ा पहनती हैं, जबकि कुछ महिलाएं नई साड़ी या लहंगा पहनकर पूजा करती हैं। करवा चौथ से पहले बाजारों में कपड़ों, आभूषणों, मेहंदी और श्रृंगार के सामान की खरीदारी भी बढ़ जाती है।
करवा चौथ की पूजा विधि
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। परंपरा के अनुसार, सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण की जाती है। इसके बाद दिनभर व्रत रखा जाता है।
शाम को महिलाएं पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा के लिए करवा, जल, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। इसके बाद करवा माता की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।
रात में चंद्रमा निकलने पर महिलाएं चंद्र दर्शन करती हैं, अर्घ्य देती हैं और परंपरा के अनुसार अपने पति को छलनी से देखकर व्रत खोलती हैं। हालांकि, पूजा की कुछ परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।
करवा चौथ की कथा का धार्मिक महत्व
करवा चौथ पर व्रत कथा सुनने की विशेष परंपरा है। प्रचलित कथाओं में वीरवती की कथा प्रमुख मानी जाती है। इस कथा के माध्यम से व्रत के प्रति श्रद्धा, विश्वास और संकल्प के महत्व को बताया जाता है।
महिलाएं पूजा के दौरान कथा सुनकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ बैठकर पूजा करती हैं और एक-दूसरे को करवा चौथ की शुभकामनाएं देती हैं।
करवा चौथ पर बाजारों में रहती है रौनक
करवा चौथ के अवसर पर बाजारों में खास चहल-पहल देखने को मिलती है। महिलाएं पूजा की थाली, करवा, छलनी, दीपक, मिठाइयां और श्रृंगार का सामान खरीदती हैं। मेहंदी लगवाने और पारंपरिक परिधान खरीदने के लिए भी बाजारों में भीड़ रहती है।
समय के साथ करवा चौथ पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी बन गया है। कई परिवारों में पति भी अपनी पत्नी के प्रति सम्मान और साथ निभाने की भावना व्यक्त करते हुए व्रत में सहयोग करते हैं।
करवा चौथ भारतीय परंपरा, आस्था और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे महिलाएं हर वर्ष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं।