यूपी: छत चटकी, 40 जगह झरने की तरह बहा पानी…सीएम योगी आते तो खुल जाती शिवाजी म्यूजियम की पोल
आगरा के निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम में बारिश के दौरान 40 से अधिक जगहों पर पानी टपकने और छत के स्लैब में दरारें आने का मामला सामने आया है। करीब 197.27 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2022 में आईआईटी रुड़की ने भी दरारों को लेकर सुझाव दिए थे।
आगरा। ताजमहल से करीब एक किलोमीटर दूर निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम में बारिश के दौरान पानी टपकने और छत के स्लैब में दरारें आने का मामला सामने आया है। म्यूजियम में 40 से अधिक स्थानों पर पानी का रिसाव होने की बात सामने आई है। प्रवेश द्वार के पास छत के स्लैब में भी दरारें दिखाई दे रही हैं। करीब 197.27 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शुक्रवार को म्यूजियम का निरीक्षण करना था, लेकिन बारिश के कारण उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया। निरीक्षण की तैयारी के लिए लगाए गए मंच और एलईडी स्क्रीन के आसपास भी पानी टपकता रहा। परिसर की दीवारों और फर्श पर पानी भरने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
40 से अधिक स्थानों पर पानी का रिसाव
बारिश के दौरान म्यूजियम की छत से कई स्थानों पर पानी गिरता रहा। छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी गैलरी में भी पानी भरने की स्थिति सामने आई। सीढ़ियों पर पानी टपकने से वहां बिछाया गया कालीन गीला और फिसलन भरा हो गया। जिस गैलरी का मुख्यमंत्री को निरीक्षण करना था, उसके भूतल पर भी पानी का तेजी से रिसाव होता रहा।
म्यूजियम का निर्माण राजकीय निर्माण निगम की देखरेख में टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा प्री-कास्ट तकनीक से कराया जा रहा है। परियोजना की लागत करीब 197.27 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा होने का दावा किया जा रहा है।
197 करोड़ के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने म्यूजियम की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इमारत का निर्माण करीब 10 वर्षों से चल रहा है। ऐसे में छत के स्लैब में दरारें आने और बारिश में पानी टपकने के कारणों की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने भवन में सीलन को भी नुकसानदायक बताते हुए निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कागजों में छत और वाटरप्रूफिंग का काम पूरा
परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, म्यूजियम की 18,188 वर्गमीटर छत का काम पूरा हो चुका है। दूसरे तल पर करीब 150 वर्गमीटर का काम बाकी बताया गया है। इसके अलावा 3,540 वर्गमीटर क्षेत्र में वाटरप्रूफिंग किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसके बावजूद बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और परिसर में जलभराव की स्थिति सामने आई। इससे वाटरप्रूफिंग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्ष 2022 में आईआईटी रुड़की ने किया था सर्वे
म्यूजियम की छत में दरारों का मामला नया नहीं है। वर्ष 2022 में तत्कालीन मंडलायुक्त ने भूतल के प्रवेश द्वार पर प्री-कास्ट स्लैब और बीम में दरारें आने के बाद आईआईटी रुड़की से सर्वे कराया था।
मार्च 2022 में आईआईटी रुड़की की ओर से दी गई रिपोर्ट में विभिन्न स्थानों पर मिली दरारों और बीम से जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए सुझाव दिए गए थे। इसके बाद चटके हुए स्लैब को सहारा देने के लिए लोहे के सपोर्ट लगाए गए थे। प्रवेश द्वार के दोनों ओर ये सपोर्ट अब भी दिखाई देते हैं। हालांकि, दरारों की स्थिति को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं।
निर्माण निगम ने बारिश को बताया कारण
राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर हरेंद्र सिंह के अनुसार, बारिश के कारण छत से पानी आया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अचानक तय हुआ था, इसलिए छत का काम समय पर नहीं हो पाया। अब छत से संबंधित कार्य कराया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी रुड़की की सिफारिशों के अनुसार ही लोहे के सपोर्ट लगाए गए थे। उनके मुताबिक, चटके हुए स्लैब को बदलना संभव नहीं है।
जांच और मरम्मत पर टिकी निगाहें
करीब 197.27 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वपूर्ण पर्यटन प्रोजेक्ट में पानी के रिसाव और छत की दरारों का मामला सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिसाव रोकने, दरारों की स्थिति का आकलन करने और भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।