दशहरा 2026: नाभि में तीर लगते ही निकलेगा अमृत जल, 120 फीट का रावण करेगा अट्टहास; हिलेंगी आंखें और हाथ
आगरा की ऐतिहासिक रामलीला में विजयादशमी पर 120 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा। आधुनिक तकनीक से तैयार रावण की आंखें और हाथ हिलेंगे, वह अट्टहास करेगा और नाभि में तीर लगते ही अमृत जल निकलेगा। मथुरा का मुस्लिम कारीगर परिवार पांच पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रहा है।
आगरा। बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर इस बार आगरा की ऐतिहासिक रामलीला में आकर्षण का केंद्र 120 फीट ऊंचा रावण का पुतला होगा। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कारीगरी के संगम से तैयार किए जा रहे इस विशाल दशानन की आंखें और हाथ हिलेंगे। रावण अट्टहास भी करेगा। वहीं, भगवान श्रीराम का तीर नाभि में लगते ही अमृत जल की धारा निकलने का विशेष दृश्य दर्शकों को रोमांचित करेगा।
इस विशाल पुतले को तैयार करने की जिम्मेदारी मथुरा का एक मुस्लिम परिवार निभा रहा है। 82 वर्षीय अनुभवी कारीगर जफर अली और उनके सहयोगी आमिर समेत दर्जनों कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यह परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से रामलीला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाता आ रहा है। इसकी कारीगरी भारतीय संस्कृति की साझा विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत मिसाल पेश करती है।
600 बांसों से तैयार हो रहा 120 फीट का रावण
कारीगर आमिर के मुताबिक, 120 फीट ऊंचे रावण का पुतला तैयार करने के लिए करीब 600 बांसों को चीरकर उनकी पतली-पतली खपच्चियां बनाई गई हैं। पुतले को आकार देने और तैयार करने में लगभग 125 किलोग्राम रद्दी कागज और दो क्विंटल लेई का इस्तेमाल किया जाएगा। इतने विशाल पुतले को तैयार करने में कई दिनों की मेहनत और कारीगरों की विशेष कुशलता लगती है।
रावण के साथ 70 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 35 फीट ऊंचा मेघनाद का पुतला भी तैयार किया जा रहा है। तीनों पुतलों को पारंपरिक तरीके से बनाने के साथ इस बार तकनीक का विशेष इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे दहन का दृश्य पहले से अधिक आकर्षक और जीवंत दिखाई देगा।
आंखें और हाथ हिलाएगा रावण, अट्टहास से गूंजेगा मैदान
इस बार रावण के पुतले में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी आंखों और मुंह को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे हिलते हुए दिखाई देंगे। इसके हाथों की गतिविधियां और रावण का अट्टहास भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
कारीगरों के अनुसार, भगवान श्रीराम का तीर रावण की नाभि में लगते ही वहां से अमृत जल निकलने का दृश्य तैयार किया जाएगा। तकनीक और रचनात्मकता के इस मेल से विजयादशमी के आयोजन को और भी भव्य बनाने की तैयारी है।
पांच पीढ़ियों से चली आ रही है पुतले बनाने की परंपरा
मथुरा के जफर अली का परिवार पांच पीढ़ियों से रामलीला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम कर रहा है। 82 वर्ष की उम्र में भी जफर अली अपने सहयोगियों के साथ इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
धार्मिक आयोजनों के लिए पुतले बनाने की यह परंपरा केवल एक कला तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी भाईचारे, सहयोग और साझा सांस्कृतिक विरासत का संदेश भी देती है। आगरा की ऐतिहासिक रामलीला में इस बार 120 फीट ऊंचे रावण का दहन इसी परंपरा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम के साथ खास आकर्षण बनने जा रहा है।