आगरा MLC चुनाव: मतदान की सीख देने वाले गुरुजी...खुद ही नहीं कर सके सही से मतदान
आगरा एमएलसी चुनाव की मतगणना में शिक्षक सीट के पहले चक्र में 861 और स्नातक सीट के पहले चक्र में 928 वोट अवैध पाए गए। दूसरे चक्र में स्नातक सीट पर 796 मत निरस्त हुए, जिससे मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठे।
आगरा। लोकतंत्र में मतदान का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी सही तरीके से वोट डालना भी है। आगरा खंड शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव की मतगणना के दौरान बड़ी संख्या में मत अवैध पाए गए। हैरानी की बात यह रही कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी सैकड़ों मत निरस्त हुए, जबकि शिक्षक विद्यार्थियों को मतदान के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बारे में जागरूक करते हैं।
मतगणना के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कई प्रत्याशियों को मिले वोटों की संख्या अवैध घोषित किए गए मतों से भी कम रही। इससे मतपत्र भरने के सही तरीके और मतदाता जागरूकता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षक एमएलसी चुनाव के पहले चक्र में 861 मत अवैध
आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना के पहले चक्र में कुल 861 मत अवैध घोषित किए गए। चुनाव मैदान में उतरे 12 प्रत्याशियों में से आठ ऐसे रहे, जिन्हें अवैध मतों की संख्या से भी कम वोट मिले। एक प्रत्याशी को 861 मत प्राप्त हुए।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि मतपत्र भरने में हुई छोटी-सी गलती भी मतदाता की पसंद को अमान्य बना सकती है। हालांकि, अवैध मतों की संख्या अधिक होने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
स्नातक एमएलसी चुनाव में भी बड़ी संख्या में मत निरस्त
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में भी अवैध मतों की संख्या काफी अधिक रही। पहले चक्र में 928 मत अवैध पाए गए, जबकि दूसरे चक्र में 796 मत निरस्त घोषित किए गए।
दोनों चक्रों में कुल 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इनमें से 10 प्रत्याशियों को मिले वोटों की संख्या अवैध घोषित किए गए मतों से कम रही। इस स्थिति ने मतपत्र पर वरीयता दर्ज करने के तरीके को लेकर चर्चा तेज कर दी।
एमएलसी चुनाव में कैसे डाला जाता है वोट?
लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनावों की मतदान प्रक्रिया से एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया अलग होती है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता बैलेट पेपर के माध्यम से अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को वरीयता देते हैं।
मतदाता को अपनी पहली पसंद के प्रत्याशी के सामने अंक '1', दूसरी पसंद के सामने '2' और इसी तरह आगे की वरीयताएं निर्धारित तरीके से दर्ज करनी होती हैं। इसके लिए मतदान केंद्र पर उपलब्ध कराए गए निर्धारित पेन का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि मतदाता निर्धारित नियमों के अनुसार वरीयता दर्ज नहीं करता या मतपत्र पर ऐसी गलती करता है जिससे मत की वैधता प्रभावित होती है, तो उसका वोट अवैध घोषित हो सकता है।
मतपत्रों में कहां हुई गलती?
मतगणना के दौरान अवैध मतपत्रों को अलग रखा गया और वैध मतों की गणना के बाद उनकी गिनती की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई मतपत्रों में निशान सही तरीके से लगाए गए थे, लेकिन कुछ मतदाताओं ने वरीयता को अंकों में लिखने के बजाय शब्दों में दर्ज किया था।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि मतगणना के दौरान बड़ी संख्या में अवैध मत मिले हैं।
मतदाता जागरूकता पर उठे सवाल
मतदान का तरीका समझाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया से पहले जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मत अवैध घोषित होना चिंता का विषय है। खासकर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे आंकड़े सामने आने से मतपत्र भरने के सही तरीके के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता महसूस होती है।
एमएलसी चुनाव में वरीयता आधारित मतदान होने के कारण मतदाताओं को सामान्य मतदान प्रक्रिया से अलग नियमों की जानकारी होना जरूरी है। भविष्य में ऐसे अवैध मतों की संख्या कम करने के लिए मतदान से पहले स्पष्ट निर्देश, उदाहरण आधारित प्रशिक्षण और मतदाताओं को प्रक्रिया समझाने पर अधिक ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
आगरा एमएलसी चुनाव की मतगणना में सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि मतदान में केवल भाग लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मतपत्र पर अपनी पसंद सही तरीके से दर्ज करना भी उतना ही जरूरी है।