Agra News: धरोहर बचाने के लिए कागजों पर चली कवायद, दो साल बाद भी जोहरा बाग की मरम्मत शुरू नहीं
आगरा के ऐतिहासिक जोहरा बाग की तीन मंजिलें बारिश में ढहने के दो साल बाद भी मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। संरक्षण के लिए 60 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं।
आगरा। यमुना किनारे चीनी का रोजा के पास स्थित करीब 500 साल पुराना जोहरा बाग धीरे-धीरे बदहाल होता जा रहा है। मुगलकालीन इस ऐतिहासिक स्मारक का बड़ा हिस्सा अक्टूबर 2024 में हुई बारिश के दौरान ढह गया था। हादसे को करीब दो साल बीतने के बावजूद स्मारक की क्षतिग्रस्त तीन मंजिलों का संरक्षण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्मारक को संरक्षित करने की प्रक्रिया में थ्री-डी स्कैनिंग समेत जरूरी तैयारियां पूरी की हैं। वहीं, पहले चरण के संरक्षण कार्य के लिए करीब 60 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। इसके बावजूद मौके पर मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम शुरू होने का इंतजार है।
बारिश में ढह गया था जोहरा बाग का बड़ा हिस्सा
अक्टूबर 2024 में लगातार बारिश के दौरान जोहरा बाग का करीब तीन चौथाई हिस्सा ढह गया था। लाल बलुआ पत्थरों से बने इस स्मारक के क्षतिग्रस्त होने के बाद मलबा हटाया गया और उखड़े हुए पत्थरों को मसाले की मदद से व्यवस्थित किया गया। हालांकि, ढही हुई तीनों मंजिलों को दोबारा संरक्षित करने का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है।
स्मारक तक चीनी का रोजा से सामान पहुंचाने के लिए बनाया गया पाथवे भी बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। एएसआई के पास स्मारक की गिरी हुई मंजिलों की तस्वीरों के अलावा पर्याप्त तकनीकी विवरण उपलब्ध नहीं था। इसी वजह से स्मारक की थ्री-डी स्कैनिंग कराई गई, जिसमें काफी समय लगा।
मुगल इतिहास से जुड़ा है जोहरा बाग
जोहरा बाग सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि आगरा के मुगल इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऑस्ट्रियाई इतिहासकार एब्बा कोच की पुस्तक Riverfront Gardens of Agra में उल्लेख मिलता है कि शाहजहां ने मई 1638 में यहां ईरानी राजदूत यादगार बेग का भव्य स्वागत किया था। विदेशी मेहमान के साथ बाग की सैर के बाद शाम को आतिशबाजी भी कराई गई थी।
वर्ष 1652 में राजकुमार औरंगजेब अपनी बहन जहांआरा से मिलने जोहरा बाग आए थे। इतिहास के अनुसार वर्ष 1835 तक यह बाग रामबाग की तुलना में बेहतर स्थिति में था। मुगल राजकुमारी जहांआरा ने इसकी सबसे ऊपरी मंजिल पर मेहराबों के साथ छतरी भी जुड़वाई थी।
कई मुगल शासकों की वास्तुकला की झलक
पुरातत्वविद डॉ. आरके दीक्षित के अनुसार, जोहरा बाग में बाबर से लेकर शाहजहां तक अलग-अलग मुगल शासकों के दौर की वास्तुकला के नमूने देखने को मिलते थे। यही वजह है कि यह स्मारक आगरा की ऐतिहासिक धरोहरों में विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि यहां अलग-अलग कालखंडों की वास्तुकला का अनूठा मेल दिखाई देता था। ऐसे में इसके संरक्षण में किसी तरह की लापरवाही ऐतिहासिक विरासत को और नुकसान पहुंचा सकती है।
डिजाइन के आधार पर होगा संरक्षण
अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि जोहरा बाग की छतरियों के अंदर की डिजाइन और निर्माण शैली को समझने के लिए थ्री-डी स्कैनिंग कराई गई है। स्मारक को पुराने स्वरूप में संरक्षित करने के लिए प्रत्येक हिस्से की डिजाइन और संरचनात्मक जानकारी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि संरक्षण कार्य के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। पूरी तकनीकी तैयारी और डिजाइन तैयार होने के बाद मौके पर काम शुरू किया जाएगा।
जोहरा बाग आगरा की उन ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है, जो मुगलकालीन वास्तुकला और इतिहास की कई परतों को अपने भीतर समेटे हुए है। अब जरूरत है कि कागजी प्रक्रिया से आगे बढ़कर संरक्षण कार्य जमीन पर दिखाई दे, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।