यूपी: आगरा की लाइफ लाइन जख्मी, एमजी रोड के गड्ढों में सफर; जाम और प्रदूषण से बेहाल 10 लाख लोग
आगरा की एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण और सीवर लाइन की खोदाई से गड्ढे, धूल और जाम की समस्या बढ़ गई है। रोजाना लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों ने सड़क सुधारने का आश्वासन दिया है।
आगरा: शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली एमजी रोड इन दिनों बदहाली का शिकार है। भगवान टॉकीज से प्रतापपुरा चौराहे तक करीब छह किलोमीटर लंबी इस सड़क पर गड्ढे, धूल और जगह-जगह बैरिकेडिंग के कारण लोगों का सफर मुश्किल हो गया है। मेट्रो निर्माण और सीवर लाइन की खोदाई के चलते कई हिस्सों में यातायात प्रभावित है। रोजाना लाखों लोगों को इस मार्ग से गुजरते समय जाम और खराब सड़क की समस्या झेलनी पड़ रही है।
भगवान टॉकीज से नगर निगम और सूरसदन से सेंट जोंस रेलवे पुल तक सड़क की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। सूरसदन से हरीपर्वत के बीच सीवर लाइन की खोदाई के कारण सड़क की चौड़ाई कुछ स्थानों पर काफी कम हो गई है। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और लोगों को लंबे समय तक जाम में फंसना पड़ रहा है।
मेट्रो निर्माण के बीच गड्ढों से बढ़ी परेशानी
ब्रिटिश काल में ड्रमंड रोड के नाम से पहचानी जाने वाली यह सड़क आजादी के बाद ठंडी सड़क के नाम से जानी गई। बाद में चौड़ीकरण के बाद एमजी रोड आगरा के प्रमुख यातायात मार्गों में शामिल हो गई। आज इस मार्ग पर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंचने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
वर्तमान में मेट्रो निर्माण, सीवर लाइन की खोदाई, बैरिकेडिंग और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर कई जगह गड्ढे बन गए हैं। दिनभर उड़ती धूल और उबड़-खाबड़ रास्तों से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। संकरे रास्तों के कारण यातायात का दबाव बढ़ जाता है और कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनती है।
एमजी रोड पर हैं शहर के प्रमुख कार्यालय और शिक्षण संस्थान
एमजी रोड आगरा के लिए केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शहर की आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। इस मार्ग पर जिला अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, सेंट जोंस कॉलेज, हॉलमैन इंस्टीट्यूट, लेडी लॉयल, क्यूवी इंटर कॉलेज और एमडी जैन इंटर कॉलेज जैसे संस्थान स्थित हैं।
इसके अलावा कलेक्ट्रेट, कोषागार, पेंशन कार्यालय, जिला न्यायालय, संजय प्लेस का व्यावसायिक क्षेत्र, आयकर विभाग, एलआईसी मंडल कार्यालय, केंद्रीय सरकारी कार्यालय और ललित कला संस्थान तक पहुंचने के लिए भी इस मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में सड़क की बदहाली का असर आम लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है।
गड्ढों वाली सड़क से सेहत पर भी असर
खराब सड़क पर लगातार वाहन चलाने से लोगों को शारीरिक परेशानी भी हो सकती है। एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र शकुंत के अनुसार, ओपीडी में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें करीब 35 प्रतिशत मरीज कमर, गर्दन, रीढ़ की हड्डी, कंधे और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। इनमें दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने वाले युवाओं की संख्या भी शामिल है।
डॉ. शकुंत के मुताबिक, गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर वाहन चलाने से शरीर को बार-बार झटके लगते हैं। लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों में वाहन चलाने से गर्दन, कमर और कंधों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
शेयर सोसाइटी के सचिव डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने एमजी रोड की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सड़क निर्माण से जुड़ी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, गड्ढों के कारण लोग जाम में फंस रहे हैं और कमर तथा रीढ़ की हड्डी में दर्द जैसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सड़क की तत्काल मरम्मत और गड्ढों की अस्थायी पैचिंग कराने की मांग की।
वहीं, स्थानीय निवासी प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि सूरसदन से सेंट जोंस और साईं की तकिया से प्रतापपुरा तक सड़क की हालत खराब है। उनके मुताबिक, दोपहिया वाहन चालकों को दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सड़क की स्थिति सुधारने और निर्माण कार्य को व्यवस्थित तरीके से कराने की मांग की।
यूपीएमआरसी ने कहा, गड्ढे भरवाए जा रहे हैं
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के पीआरओ पंचानन मिश्रा ने बताया कि सड़क के कुछ हिस्सों में डामर डालकर निर्माण कराया गया है, जबकि कई स्थानों पर काम अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सड़क को नए सिरे से बनाया जाएगा।
उनके अनुसार, फिलहाल गड्ढों को भरवाया जा रहा है। सूरसदन के पास सीवर लाइन डालने के बाद रेत और गिट्टी डालकर सड़क को ठीक किया गया है।
वहीं, जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एमजी रोड की स्थिति सुधारने के लिए यूपीएमआरसी और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं। मेट्रो अधिकारियों से कहा गया है कि जहां निर्माण कार्य पूरा होता जाए, वहां बैरिकेडिंग हटाने के साथ सड़क का निर्माण भी कराया जाए।
रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही, सुधार का इंतजार
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एमजी रोड से प्रतिदिन करीब 2.25 लाख वाहन गुजरते हैं और इस मार्ग से 10 लाख तक लोगों की आवाजाही होती है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों का आवागमन भी इससे जुड़ा है।
ऐसे में एमजी रोड की बदहाल स्थिति शहर के यातायात और जनजीवन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। लोगों को उम्मीद है कि मेट्रो और सीवर लाइन का काम व्यवस्थित तरीके से पूरा होगा तथा सड़क की मरम्मत जल्द कराई जाएगी, ताकि उन्हें गड्ढों, धूल और जाम से राहत मिल सके।