उद्घाटन के चंद मिनट बाद ही परिवहन मेले में पसर गया सन्नाटा, रवाना हो गए अधिकारी
आगरा परिवहन मेले में उद्घाटन के कुछ मिनट बाद ही अधिकारी अपनी कुर्सियां छोड़कर चले गए। शिकायत लेकर पहुंचे लोग अधिकारियों को तलाशते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
आगरा। लोगों की समस्याएं सुनने और उन्हें राहत पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित परिवहन मेले की व्यवस्थाओं की पोल उद्घाटन के कुछ ही मिनट बाद खुल गई। मेले का उद्घाटन होते ही अधिकारी मौके से रवाना हो गए। इसके बाद शिकायत लेकर पहुंचे लोगों को अपनी समस्याएं बताने के लिए अधिकारियों की तलाश में भटकना पड़ा। मौके पर अधिकारियों की गैरमौजूदगी से लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
दरअसल, आगरा में परिवहन विभाग की ओर से लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए परिवहन मेले में शिविर लगाया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि यहां संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे और उनकी शिकायतों पर सुनवाई कर उन्हें राहत दी जाएगी। लेकिन उद्घाटन की औपचारिकता पूरी होते ही अधिकारियों के जाने से शिविर की व्यवस्था कुछ ही देर में बिखर गई।
शिकायत लेकर पहुंचे लोग, नहीं मिले अधिकारी
मेले में अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोग संबंधित अधिकारियों को तलाशते रहे, लेकिन अधिकांश अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे। उद्घाटन के बाद कुर्सियां खाली पड़ी रहीं और धीरे-धीरे मेले में सन्नाटा छा गया। लोगों को उम्मीद थी कि अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी शिकायतों का समाधान होगा, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।
सिर्फ एआरटीओ विनय कुमार बैठे मिले
मेले में अधिकारियों के जाने के बाद सिर्फ एआरटीओ विनय कुमार ही मौके पर बैठे हुए थे। उनके पास कुछ लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे और अपनी समस्याएं बताईं। बाकी अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण लोगों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल सकी।
खाली कुर्सियों ने खोली व्यवस्था की पोल
परिवहन मेले का उद्देश्य लोगों को एक ही स्थान पर सुविधाएं और शिकायतों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराना था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही मिनट बाद अधिकारियों के चले जाने से इस उद्देश्य पर सवाल खड़े हो गए। मेले में खाली पड़ी कुर्सियां और अधिकारियों की तलाश करते लोग व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति बयां करते नजर आए।
लोगों को उम्मीद थी कि परिवहन मेला उनकी समस्याओं के समाधान का माध्यम बनेगा, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के चलते कई लोगों को बिना शिकायत दर्ज कराए या समाधान पाए ही वापस लौटना पड़ा।