दुर्लभ संयोग: खरीदारी के लिए बेहद शुभ 1 नवंबर, मकान की रजिस्ट्री या फिर नए निवेश; होगा लाभ ही लाभ
1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इस शुभ अवसर पर सोना-चांदी, वाहन, मकान और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुभ माना जाता है।
दिवाली और धनतेरस से पहले खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 1 नवंबर का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में रविवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग बनने से रवि पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद शुभ और अबूझ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना-चांदी, वाहन, मकान, जमीन और अन्य जरूरी सामान खरीदने से घर में सुख, समृद्धि और स्थायित्व आता है।
इस बार 5 नवंबर को धनतेरस और 6 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। ऐसे में त्योहारों से पहले 1 नवंबर को बनने वाला रवि पुष्य योग बाजारों में खरीदारी के लिए विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ कार्यों और निवेश को लंबे समय तक लाभकारी माना जाता है।
दो दिन तक रहेगा पुष्य नक्षत्र का प्रभाव
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुसार, 1 नवंबर को रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी इस दिन शुभ कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। सोना-चांदी, मशीनरी, संपत्ति और घर के उपयोगी सामान की खरीदारी की जा सकती है। ज्वेलरी के साथ मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता के अनुसार, पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर को सुबह 5:41 बजे शुरू होकर 2 नवंबर को सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। इस कारण खरीदारी के लिए दो दिन तक विशेष योग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ऐसा संयोग करीब दो साल बाद बन रहा है।
जानिए रवि पुष्य योग के शुभ मुहूर्त
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो 1 नवंबर को सुबह 6:32 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक रहेगा।
प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
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पुष्य नक्षत्र: 1 नवंबर सुबह 5:41 बजे से 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक।
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सर्वार्थ सिद्धि योग: 1 नवंबर सुबह 6:32 बजे से 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक।
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक।
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:02 बजे तक।
विवाह की खरीदारी के लिए भी शुभ माना जाता है पुष्य नक्षत्र
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में विवाह से संबंधित सामान की खरीदारी करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए भी यह नक्षत्र विशेष महत्व रखता है।
बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, इस दिन जरूरत के अनुसार खरीदारी करना लाभकारी माना जाता है। सोना-चांदी, मकान, उद्योगों के अधिग्रहण, टेंडर और जमीन से जुड़े कार्यों के लिए भी इस नक्षत्र को उपयुक्त माना गया है।
दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का भी विशेष महत्व
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को विशेष स्थान प्राप्त है। इसका स्वामी शनि, राशि कर्क और राशि के स्वामी चंद्रमा माने जाते हैं। वहीं, इसके देवता देवगुरु बृहस्पति हैं।
मान्यता है कि इस नक्षत्र में सकारात्मक भावना से किए गए कार्य शुभ फल देते हैं। इस दिन दान-पुण्य, जप और तप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
रवि पुष्य योग में क्या-क्या खरीद सकते हैं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य योग में जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार कई तरह की खरीदारी की जा सकती है।
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सोना-चांदी: सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के और ज्वेलरी।
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वाहन: कार, बाइक और अन्य वाहन।
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प्रॉपर्टी: मकान, प्लॉट, जमीन और संपत्ति में निवेश।
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इलेक्ट्रॉनिक्स: लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
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गृहस्थी का सामान: नए बर्तन, कपड़े और घर के उपयोगी सामान।
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धार्मिक सामग्री: देवी-देवताओं की मूर्तियां और धार्मिक पुस्तकें।
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व्यापार: नए बही-खाते, मशीनरी और उद्योग से जुड़ी खरीदारी।
दिवाली और धनतेरस से पहले बन रहा यह रवि पुष्य नक्षत्र खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिहाज से धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है।