आगरा नगर निगम सदन की हंगामेदार शुरुआत, भाजपा और बसपा पार्षदों में टकराव
आगरा नगर निगम का सामान्य सदन साढ़े तीन महीने बाद शुक्रवार को शुरू हुआ। बसपा पार्षद सुनील शर्मा के काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठने से हंगामा मच गया। भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
आगरा। करीब साढ़े तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को आगरा नगर निगम का सामान्य सदन आयोजित किया गया। बैठक की शुरुआत मिठाई बांटकर सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन कुछ ही देर में सदन राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। बसपा पार्षद सुनील शर्मा के विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। हंगामे के दौरान सदन में जय श्रीराम के नारे भी गूंजने लगे।
नगर निगम के सदन कक्ष में आयोजित बैठक में महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा, नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य, नगर निगम के अधिकारी और विभिन्न वार्डों के पार्षद मौजूद रहे। लंबे समय बाद सदन की बैठक होने के कारण पार्षदों में कई मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद थी।
आंखों पर काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठे बसपा पार्षद
बैठक की शुरुआत में पार्षदों को मिठाई खिलाई गई। हालांकि, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा के अपनी बात रखने से पहले ही बसपा पार्षद सुनील शर्मा ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली और सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए।
सुनील शर्मा के इस विरोध प्रदर्शन से सदन की कार्यवाही का माहौल अचानक गरमा गया। उनके प्रदर्शन के बाद अन्य पार्षद भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। देखते ही देखते भाजपा और बसपा के पार्षद आमने-सामने आ गए।
भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक
विरोध प्रदर्शन को लेकर दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। सदन में शोर-शराबा बढ़ने लगा और राजनीतिक नारेबाजी भी होने लगी। हंगामे के बीच जय श्रीराम के नारे गूंजने से बैठक का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
जिस सदन की शुरुआत मिठाई बांटकर आपसी सौहार्द के संदेश के साथ हुई थी, वही बैठक कुछ ही देर में राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बन गई।
साढ़े तीन महीने बाद सदन की शुरुआत हंगामे से
करीब साढ़े तीन महीने बाद बुलाई गई नगर निगम की सामान्य सदन बैठक से शहर के विकास, जनसमस्याओं और पार्षदों के मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद थी। लेकिन बैठक की शुरुआत ही विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव से हुई।
नगर निगम सदन में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पार्षदों के बीच आपसी समन्वय और सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण तरीके से संचालित करने की जरूरत को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि सदन की आगामी कार्यवाही में शहर की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर कितनी गंभीरता से चर्चा हो पाती है।