नंगे पैर, चुभती गिट्टियां और अटूट आस्था: भ्रष्ट व्यवस्था के बीच 44 किमी की कठिन परिक्रमा, ये तस्वीरें कर देंगी भावुक
आगरा में 44 किमी की शिव परिक्रमा पर निकले श्रद्धालुओं को बदहाल सड़कों, गड्ढों और बिखरी गिट्टियों से परेशानी हुई। नंगे पैर भक्तों के लिए उखड़ी सड़कें बड़ी चुनौती बनीं।
आगरा। सावन के दूसरे सोमवार पर जलाभिषेक से पहले रविवार शाम हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के चार प्रमुख मंदिरों की 44 किलोमीटर लंबी नगर परिक्रमा पर निकले। भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु नंगे पैर सड़कों पर चलते रहे, लेकिन कई स्थानों पर उखड़ी सड़कें, बिखरी गिट्टियां, गड्ढे, कीचड़ और जलभराव उनके लिए बड़ी परेशानी बन गए।
परिक्रमा मार्ग की बदहाल स्थिति ने नगर निगम की सड़क व्यवस्था और तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। श्रद्धालुओं का कहना था कि आस्था के कारण वे कठिन रास्तों पर भी चलते रहे, लेकिन कई जगह सड़क की स्थिति ऐसी थी कि नंगे पैर चलना बेहद मुश्किल हो गया।
24 घंटे पहले कराया पैचवर्क, श्रद्धालुओं के कदम पड़ते ही उखड़ा
परिक्रमा से करीब 24 घंटे पहले कई स्थानों पर सड़क के गड्ढों को भरने के लिए पैचवर्क कराया गया था। हालांकि, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के बाद कुछ स्थानों पर पैचवर्क उखड़ गया और सड़क पर गिट्टियां फैल गईं।
बल्केश्वर से वाटरवर्क्स की ओर इंडिया कास्टिंग के पास सड़क पर किया गया पैचवर्क कई जगह उखड़ा नजर आया। वहीं, बल्केश्वर तिराहे के पास सीवर मरम्मत के बाद सड़क पर छोड़ी गई गिट्टियों से श्रद्धालुओं को परेशानी हुई।
आईटीआई गेट और जीवनी मंडी के पास भी सड़क पर बिखरे कंकड़ नजर आए। काली माता मंदिर के पास मुख्य मार्ग पर मौजूद गड्ढों से श्रद्धालु बचते-बचाते आगे बढ़ते रहे।
नंगे पैर भक्तों के लिए कंकड़ बने बड़ी चुनौती
भगवान शिव की भक्ति में नंगे पैर निकले श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर तक उखड़ी सड़कों और गिट्टियों से होकर गुजरना पड़ा। जगह-जगह सड़क की खराब स्थिति के कारण भक्तों को संभलकर कदम रखना पड़ा।
कई श्रद्धालु हाथ में जल से भरा लोटा लेकर आगे बढ़ते रहे तो कुछ भक्त जयकारे लगाते हुए परिक्रमा पूरी करने में जुटे रहे। कठिन रास्तों के बावजूद आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही।
घर से परिक्रमा मार्ग तक भी नहीं आसान रहा सफर
श्रद्धालुओं की परेशानी सिर्फ मुख्य परिक्रमा मार्ग तक सीमित नहीं रही। घरों से निकलकर परिक्रमा मार्ग तक पहुंचने वाले कई रास्तों पर भी उन्हें जर्जर सड़क, कीचड़ और जलभराव से गुजरना पड़ा।
ककरैठा, आवास विकास, दहतोरा, दौरेठा, यमुना पार, फतेहाबाद रोड के 100 फुटा मार्ग और शास्त्रीपुरम समेत कई इलाकों में सड़क की स्थिति श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बनी रही।
विकास के दावों पर उठे सवाल
44 किलोमीटर की नगर परिक्रमा शहर की सड़क व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी परीक्षा थी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सड़कों की स्थिति सामने आने के बाद नगर निगम की तैयारियों और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह सड़क मरम्मत का काम सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह गया। वहीं, परिक्रमा मार्ग पर बदहाल सड़कों ने शहर में चल रहे विकास कार्यों के दावों की जमीनी स्थिति भी सामने रख दी।
हालांकि, नगर निगम प्रशासन का कहना है कि बारिश के मौसम के बावजूद परिक्रमा मार्ग पर आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई गई थीं।
बारिश के बावजूद कराई गई व्यवस्थाएं: नगर आयुक्त
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि बारिश के मौसम के बावजूद निगम प्रशासन ने परिक्रमा मार्ग पर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई थीं। रविवार दोपहर अधिकारियों और पार्षदों के साथ पूरे परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण भी किया गया।
उन्होंने कहा कि बारिश खत्म होते ही सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा।
आस्था के आगे नहीं रुके शिवभक्तों के कदम
सड़कों की बदहाली, चुभती गिट्टियों और जगह-जगह मौजूद गड्ढों के बावजूद शिवभक्तों की आस्था कमजोर नहीं पड़ी। ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ श्रद्धालु नंगे पैर 44 किलोमीटर की परिक्रमा पूरी करने के लिए आगे बढ़ते रहे।
इन तस्वीरों में एक ओर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था दिखाई दी, तो दूसरी ओर शहर की सड़क व्यवस्था की जमीनी हकीकत भी सामने आई। नंगे पैर कठिन रास्तों पर चलते भक्तों के कदमों ने उन सवालों को फिर सामने ला दिया, जिनका जवाब शहर की सड़कों को अब भी इंतजार है।