नरक चतुर्दशी 2026: छोटी दिवाली आज, घर की किस दिशा में जलाना है यम दीपक? जानें पूजा का शुभ समय
छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान, रूप चौदस के स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। जानें पूजा विधि, शुभ परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं।
आगरा। दीपोत्सव के पांच दिवसीय पर्व में छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का त्योहार शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे रूप चौदस और यम चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह स्नान और उबटन लगाने की परंपरा है, जबकि शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त सरसों के तेल का दीपक जलाकर दीपदान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश प्रचेता ने बताया कि शनिवार सुबह 10:48 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी, जो रविवार सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। छोटी दिवाली पर शाम के समय यमराज के निमित्त दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। इसी घटना की स्मृति में इस पर्व को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने और नरकासुर वध की कथा का स्मरण करने की परंपरा है।
रूप चौदस पर स्नान और उबटन का महत्व
रूप चौदस के दिन सुबह स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाने और पारंपरिक उबटन का प्रयोग करने की मान्यता है। धार्मिक परंपरा में इसे आरोग्य, सौंदर्य और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इस विधि से शरीर और मन की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मकता आती है।
दक्षिण दिशा में जलाएं यम दीपक
ज्योतिषाचार्य अनिता पाराशर ने बताया कि छोटी दिवाली पर यम दीपदान का विशेष महत्व है। शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार की सुख-शांति बनी रहती है।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को फूल, धूप, दीप और मिठाई अर्पित कर पूजा करनी चाहिए। इस दिन हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
जरूरतमंदों को दान करना माना जाता है शुभ
नरक चतुर्दशी पर पूजा-पाठ के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और भोजन दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि सेवा और दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। छोटी दिवाली का पर्व धार्मिक आस्था, स्वच्छता, सेवा और सकारात्मकता का संदेश देता है।