यूपी: सांस लेना हुआ मुश्किल! प्रदूषण से नाक, गले और आंखों पर हमला, अस्पतालों में मरीजों की भीड़
आगरा में बढ़ते प्रदूषण से सांस, नाक, गले और आंखों की एलर्जी के मरीज बढ़े। एसएन मेडिकल कॉलेज में रोजाना 8 से 10 गंभीर मरीज भर्ती हो रहे हैं।
आगरा। ताजनगरी में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। हवा में धूल और धुएं के बढ़ते स्तर के कारण सांस, नाक, गले और आंखों की एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और इमरजेंसी में ऐसे मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, रोजाना 8 से 10 गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। इनमें अस्थमा अटैक और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे मरीजों को ऑक्सीजन तक देनी पड़ रही है।
प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पहले से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को हो रही है। कई मरीजों को सीने में जकड़न, तेज खांसी, बलगम और सांस लेने में परेशानी की शिकायत है। वहीं, नाक और गले में संक्रमण के साथ आंखों में जलन और खुजली के मामले भी बढ़ रहे हैं।
धूल और धुएं से बढ़ रही फेफड़ों की परेशानी
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि हवा में धूल और धुएं के कण बढ़ने से लोगों के फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके कारण सीने में जकड़न, दर्द, तेज खांसी और बलगम जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है। अस्थमा अटैक और टीबी सहित सांस संबंधी परेशानियों वाले मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। गंभीर स्थिति होने पर उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है। रोजाना करीब 8 से 10 मरीज गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं।
नाक और गले की एलर्जी के मरीज भी बढ़े
एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. रीतू गुप्ता ने बताया कि धूल और धुएं के सूक्ष्म कण नाक और गले तक पहुंचकर एलर्जी और संक्रमण की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इसके कारण लोगों को बार-बार छींक आना, जुकाम, नाक में खुजली और जलन जैसी शिकायतें हो रही हैं।
ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से पहले से एलर्जी की समस्या वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है।
आंखों में जलन और खुजली, बच्चों को ज्यादा परेशानी
नेत्र रोग विभाग के डॉ. तिरुपति नाथ ने बताया कि हवा में मौजूद धूल के कण आंखों में पहुंचकर एलर्जी पैदा कर रहे हैं। मरीजों को आंखें लाल होने, खुजली और जलन की शिकायत हो रही है।
उन्होंने बताया कि आंखों को बार-बार रगड़ने से कॉर्निया पर चोट या जख्म हो सकते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है। इसलिए आंखों में परेशानी होने पर उन्हें रगड़ने के बजाय साफ पानी से धोना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
प्रदूषण से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डॉक्टरों ने बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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बेवजह घर से बाहर निकलने से बचें और धूल-धुएं के संपर्क को कम रखें।
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जरूरी खरीदारी एक ही बार में पूरी करने की कोशिश करें।
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बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला मास्क और चश्मा लगाएं।
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आंखों में धूल जाने पर साफ पानी से धोएं, आंखों को रगड़ें नहीं।
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सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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अस्थमा के मरीज अपनी निर्धारित दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल करें।
सांस लेने में परेशानी को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलना या ऑक्सीजन की कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार और प्रदूषण से बचाव करके स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।